श्रम की ज्यामिति

कल रात उस सस्ती शराब की दुकान पर, जब तुम अपनी ‘करियर की संभावनाओं’ के बारे में बड़बड़ा रहे थे, तो मुझे उस ग्लास में तैरती हुई तेल की परत और तुम्हारे शब्दों में कोई खास फर्क नजर नहीं आया। तुम खुद को एक ‘बौद्धिक श्रमिक’ या ‘रणनीतिकार’ मानते हो? क्या बकवास है। हकीकत यह है कि तुम सूचनाओं की एक अदृश्य चक्की में जुते हुए बैल हो, जिसे यह मुगालता है कि वह खेत जोत रहा है।

जिसे तुम ‘काम’ कहते हो, वह गणितीय रूप से एक ‘रीमानियन मैनिफोल्ड’ (Riemannian Manifold) है—एक मुड़ा-तुड़ा, विषम आयामी स्थान। और तुम्हारी त्रासदी यह है कि तुम इस पर सीधी रेखाएं खींचने की कोशिश कर रहे हो।

वक्रता का भ्रम

हमेशा यही सिखाया गया न? ‘मेहनत करो, महारत हासिल करो।’ जैसे कि सफलता एक सीधी सड़क हो। अगर यह सच होता, तो पिछले पंद्रह साल से डेटा एंट्री करने वाला वह क्लर्क आज सांख्यिकी का भगवान होता। पर ऐसा नहीं है। तुम जिस सतह पर चल रहे हो, उसकी ‘ज्यामिति’ स्थिर नहीं है। तुम्हारे बॉस का खराब मूड, शेयर बाजार की हिचकियां, और तुम्हारे सिर पर मंडराता होम लोन—ये सब मिलकर उस स्थान की ‘वक्रता’ (Curvature) को हर पल बदल रहे हैं।

तुम एक ‘जियोडेसिक’ (Geodesic)—यानी सबसे छोटा रास्ता—खोजने की कोशिश में हो। लेकिन जब स्पेस ही मुड़ा हुआ हो, तो सीधी चाल भी तुम्हें गोल-गोल घुमाती है। जिसे तुम ‘अनुभव’ कहते हो, वह असल में उस भूलभुलैया में बार-बार सिर पटकने के निशान हैं। सूचना ज्यामिति (Information Geometry) की नजर से देखें, तो तुम्हारी तथाकथित ‘लगन’ और ‘जुनून’ सिर्फ थर्मोडायनामिक शोर (Thermodynamic Noise) हैं। यह वह फालतू गर्मी है जो इंजन की दक्षता को कम करती है। तुम्हारी ‘नौकरी की संतुष्टि’ बस एक रासायनिक धोखा है, जो तुम्हें यह भूलने में मदद करता है कि तुम धीरे-धीरे घिस रहे हो।

सपाट रेगिस्तान और सिलिकॉन परजीवी

और अब, कोढ़ में खाज की तरह, वे आ गए हैं—’स्वचालित न्यूरल गणना परजीवी’ (Automated Neural Computational Parasites)। लोग डर रहे हैं कि मशीनें उनकी नौकरी खा जाएंगी। यह डर कितना बचकाना है। असल खतरा नौकरी जाना नहीं है; असल खतरा है तुम्हारे कार्यक्षेत्र का ‘सपाटीकरण’ (Flattening)।

यह ठंडा, भावहीन सिलिकॉन तंत्र उस जटिल मैनिफोल्ड को, जिसे नेविगेट करने में तुमने अपनी जवानी बर्बाद कर दी, एक झटके में एक सपाट, यूक्लिडियन बंजर भूमि में बदल रहा है। पहले, जानकारी का विषम होना ही तुम्हारी रोटी का जरिया था। अब? यह कम्प्यूटेशनल दानव हर पहाड़ को पीसकर धूल कर रहा है। जब रास्ता पूरी तरह सपाट हो, तो ‘विशेषज्ञता’ का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

अब तुम एक ‘विचारक’ नहीं हो; तुम बस एक कम-रिज़ॉल्यूशन वाले बायो-सेंसर हो। तुम्हारा काम बस इतना रह गया है कि तुम उन मशीनों के लिए डेटा को साफ करो जो तुमसे लाखों गुना तेज सोचती हैं। यह बौद्धिक गुलामी का एक नया युग है, जहाँ तुम्हारे दिमाग का उपयोग सिर्फ त्रुटि सुधार (Error Correction) के लिए किया जा रहा है। इस अस्तित्वगत शून्यता से उपजे पीठ दर्द को कम करने के लिए, तुम शायद [एक एर्गोनोमिक सिंहासन](https://example.com) खरीद लेते हो, यह सोचकर कि लम्बर सपोर्ट तुम्हारी आत्मा के खोखलेपन को भर देगा। पर सच यह है कि उस गद्देदार कुर्सी पर बैठा हुआ व्यक्ति अब ड्राइवर नहीं, सिर्फ एक यात्री है—और वह भी बिना टिकट का।

एन्ट्रॉपी की जीत

सूचना ज्यामिति का एक क्रूर नियम है: जहाँ ज्यामिति सपाट होती है, वहाँ ‘सूचना लाभ’ (Information Gain) शून्य की ओर अग्रसर होता है। इसका मतलब है कि तुम जितनी ज्यादा मेहनत करोगे, तुम उतने ही ज्यादा अप्रासंगिक होते जाओगे। तुम एक ऐसी प्रणाली को ऊर्जा दे रहे हो जिसका एकमात्र उद्देश्य मानवीय जटिलता को खत्म करना है। हम ‘सभ्यता’ की आड़ में एक ऊष्मीय मृत्यु (Heat Death) की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ हर विचार, हर कला, हर रणनीति को एक मानक एल्गोरिदम में बदल दिया जाएगा।

तुम जिसे अपनी ‘रचनात्मकता’ कहते हो, वह अब बस एक सांख्यिकीय विचलन (Statistical Anomaly) है जिसे अगले अपडेट में ठीक कर दिया जाएगा।

मेरा ग्लास खाली हो चुका है। और ईमानदारी से कहूं तो, तुम्हारी यह ‘सफलता’ की कहानी सुनने की मेरी क्षमता भी। घर जाओ। जिन ईमेल्स का जवाब देने के लिए तुम कल सुबह उठने वाले हो, उन्हें एक सर्वर ने मिलीसेकंड्स पहले ही प्रोसेस कर दिया है। तुम बस एक पुरानी आदत की तरह दफ्तर जा रहे हो।

सब बकवास है।

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