विश्वविद्यालय के पिछवाड़े, जहाँ खुली नालियों की सड़ांध सस्ती इलायची की महक के साथ मिलकर एक अजीब सी उमस पैदा करती है, वहाँ बैठकर मैं तमाशा देखता हूँ। फटे हुए स्क्रीन गार्ड वाले सस्ते स्मार्टफोनों पर झुकी हुई गर्दनों की कतार। उनकी उंगलियां स्क्रीन पर ऐसे रेंग रही हैं जैसे किसी मरे हुए जानवर पर मक्खियां। वे इसे ‘माइक्रो-टास्किंग’ कहते हैं। डेटा लेबलिंग, कैप्चा भरना, या किसी अदृश्य ‘स्वचालित छंटाई मशीन’ के लिए कचरा साफ करना। उन्हें लगता है कि वे अपने खाली समय को ‘मुद्रा’ में बदल रहे हैं।
कितनी दयनीय गलतफहमी है। भौतिकी की ठंडी और निर्दयी दृष्टि से देखें, तो वे श्रम नहीं कर रहे; वे बस अपने जैविक अस्तित्व को एन्ट्रॉपी की भट्टी में झोंक रहे हैं।
शोषण की जूठन
आधुनिक अर्थव्यवस्था ने श्रम को उस हद तक चबा लिया है कि अब वह काम नहीं, बल्कि किसी और के द्वारा उगले गए भोजन की तरह दिखता है। यह वैसा ही है जैसे कोई सड़क पर गिरे हुए ‘कचौड़ी’ के टुकड़ों को बीनकर कहे कि वह दावत उड़ा रहा है। जब आप स्क्रीन पर एक चेकबॉक्स पर क्लिक करते हैं, तो आप केवल एक डिजिटल पिक्सेल को नहीं बदल रहे होते। आप अपने मस्तिष्क के न्यूरॉन्स में अरबों संभावनाओं की हत्या कर रहे होते हैं ताकि एक ‘सही’ उत्तर को चुना जा सके।
भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन के उस डिब्बे की कल्पना करें, जहाँ पसीने और सस्ते तेल की बदबू के बीच किसी की कोहनी आपकी पसलियों में धंसी है। उस घुटन में, जब आप किसी ‘एल्गोरिदम के मवेशी’ की तरह तस्वीरों में ‘साइकिल’ या ‘पुल’ खोज रहे होते हैं, तो आपका दिमाग काम नहीं कर रहा होता—वह घिस रहा होता है। यह घर्षण, यह मानसिक रगड़, आपको थकाती नहीं है; यह आपको धीरे-धीरे एक जैविक कचरे में बदल देती है।
ऊष्मा का अभिशाप
रॉल्फ लैंडऔअर ने १९६१ में ही इस त्रासदी की भविष्यवाणी कर दी थी। उनका सिद्धांत चिल्ला-चिल्लाकर कहता है: "सूचना का विलोपन ऊष्मा पैदा करता है।" यह ब्रह्मांड का नियम है। एक बिट (bit) जानकारी को मिटाना मुफ़्त नहीं है। हर बार जब आप अनिश्चितता को खत्म करते हैं, तो $kT \ln 2$ ऊर्जा गर्मी बनकर वातावरण में उड़ जाती है।
यह जून की दोपहर में एक टूटे हुए पंखे के सामने चिल्लाने जैसा है। आप जितना जोर से चीखेंगे, आपका शरीर उतना ही गर्म होगा, गला सूखेगा, और वह ऊर्जा कभी वापस नहीं आएगी। यह प्रक्रिया ‘अपरिवर्तनीय’ (Irreversible) है। आपके न्यूरॉन्स जिस ऊर्जा को जलाकर राख कर रहे हैं, वह किसी ‘डिजिटल वॉलेट’ में जमा नहीं हो रही। वह बस इस ब्रह्मांड को थोड़ा और रहने के अयोग्य बना रही है।
इस निरर्थक आत्मदाह की तुलना में, मेरी मेज पर रखी मोंटब्लैंक माईस्टरstück जैसी वस्तु एक अलग ही आयाम की लगती है। यह एक ऐसा यंत्र है जो इतिहास पर हस्ताक्षर करने के लिए बना है, न कि डिजिटल कचरे को छांटने के लिए। इसकी कीमत, जो शायद आपकी साल भर की ‘क्लिक-मजदूरी’ से भी ज्यादा हो, उस गरिमा का मूल्य है जिसे आप बहुत पहले खो चुके हैं। यह कलम स्याही से लिखती है, जबकि आप अपने जीवन के पसीने से।
अनंत विनाश
अंततः, यह तथाकथित ‘गिग इकॉनमी’ (Gig Economy) केवल एक ऊष्मागतिक घोटाला है। पूँजीवाद ने एक ऐसा तरीका खोज लिया है जिससे वह आपके मस्तिष्क की हार्ड ड्राइव को बार-बार फॉर्मेट कर सके और उससे निकलने वाली गर्मी को नजरअंदाज कर सके। आप तीन दिन पुराने, सूख चुके समोसे की तरह अपनी ताजगी खो रहे हैं, केवल इसलिए ताकि कोई अदृश्य मशीन थोड़ी और स्मार्ट हो सके।
"बकवास है यह।"
उस स्क्रीन को टैप करने वाली उंगली से जो कंपन निकलता है, वह प्रगति का संकेत नहीं है। वह एक सर्किट के जलने की गंध है। आप जितनी तेजी से काम करेंगे, दुनिया उतनी ही गर्म होती जाएगी और आप उतने ही ठंडे, निर्जीव और खाली होते जाएंगे। हम यहाँ व्यवस्था (Order) बेचकर अव्यवस्था (Chaos) खरीद रहे हैं। और सौदा पूरा हो चुका है।

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