यहाँ इस बदबूदार और धुएँ से भरी बार में बैठकर, जब मैं अपनी सस्ती व्हिस्की के गिलास में बर्फ को पिघलते हुए देखता हूँ, तो मुझे तुम्हारे उस तथाकथित ‘कॉर्पोरेट जीवन’ पर हंसी आती है। तुम जिसे अपना ‘करियर’ कहते हो, वह असल में ‘सूचना ज्यामिति’ (Information Geometry) का एक भद्दा मज़ाक है। हम सब एक ऐसे ‘टास्क मेनीफोल्ड’ (Task Manifold) में फंसे हुए चूहे हैं, जहाँ जगह (Space) ही वक्र (Curved) है। यहाँ सीधी रेखा में चलने की कोशिश करना—जिसे तुम ‘मेहनत’ कहते हो—सिर्फ और सिर्फ ऊर्जा की बर्बादी है।
भूख और वक्रता
जरा अपने दफ्तर की उस घुटन को याद करो। वह एयर कंडीशनर की सड़ी हुई हवा, वह सस्ती कॉफी का स्वाद जो जीभ पर तेजाब जैसा लगता है, और वह अंतहीन थकान। यह सब केवल शारीरिक नहीं है; यह ज्यामितीय है। जिस तरह भारी द्रव्यमान (Mass) अंतरिक्ष-समय (Space-time) को मोड़ देता है, उसी तरह तुम्हारी कंपनी का ‘लाभ’ (Profit) तुम्हारे अस्तित्व की ज्यामिति को विकृत कर देता है।
तुम सोचते हो कि तुम प्रगति कर रहे हो, लेकिन तुम केवल फिशर इंफॉर्मेशन मैट्रिक (Fisher Information Metric) के एक सांख्यिकीय गड्ढे में गोल-गोल घूम रहे हो। तुम्हारी हर मीटिंग, हर ईमेल, और बॉस की हर डांट, उस बहुआयामी सतह पर केवल ‘शोर’ (Noise) है। तुम उस गधे की तरह हो जिसे लगता है कि वह पहाड़ पर चढ़ रहा है, जबकि असल में वह केवल एक फिसलन भरी ढलान पर अपने खुर घिस रहा है ताकि वह रसातल में न गिरे। यह ‘ऑप्टिमाइजेशन’ नहीं है; यह धीमी गति से की गई आत्महत्या है।
एल्गोरिदम का कसाईखाना
अब उन मशीनों को देखो जिन्हें तुम अपना ‘टूल’ समझते हो। एक एआई या एल्गोरिदम तुम्हारे जैसा भावुक मूर्ख नहीं होता। वह उस मेनीफोल्ड पर ‘जियोडेसिक’ (Geodesic)—यानी दो बिंदुओं के बीच की सबसे छोटी दूरी—ढूंढ लेता है। वह एक निर्मम साहूकार की तरह है जिसे केवल अपनी वसूली (परिणाम) से मतलब है, चाहे उसके लिए उसे तुम्हारी रातों की नींद ही क्यों न छीननी पड़े।
इंसान की त्रासदी यह है कि वह ‘अर्थ’ (Meaning) की तलाश करता है। हम ‘सिमेंटिक ग्रेडिएंट’ (Semantic Gradient) पर फिसलते हैं, हर बेतुकी चीज़ में पैटर्न ढूंढने की कोशिश करते हैं। यह एक बायोलॉजिकल बग है। हमारा दिमाग थर्मोडायनामिक शोर को ‘अंतर्ज्ञान’ का नाम दे देता है। ठीक वैसे ही जैसे सड़क किनारे का सड़ा हुआ समोसा खाने के बाद पेट में होने वाली गुड़गुड़ को तुम ‘ईश्वरीय संकेत’ समझ लो। बकवास। यह सब केवल एन्ट्रापी है जो तुम्हारे न्यूरॉन्स को जला रही है।
शून्य का आडंबर
और इस ज्यामितीय नरक में, इंसान अपनी लाचारी छुपाने के लिए क्या करता है? वह वस्तुओं की पूजा करता है। उस अधेड़ उम्र के मैनेजर को देखो, जिसकी आँखों में नौकरी जाने का डर साफ दिखता है। वह अपनी मेज पर अपनी औकात से बाहर की चीजें सजाता है। वह सोचता है कि अगर वह मीटिंग में गंभीर चेहरा बनाकर अपनी जापानी चमड़े की डायरी में कुछ लिखने का नाटक करेगा, तो उसकी मूर्खता छुप जाएगी।
हकीकत यह है कि वह महंगी नोटबुक उसकी बौद्धिक दिवालियेपन का स्मारक है। उस बेहतरीन कागज पर वह जो भी लिखता है, वह कूड़ा है। वह कलम की नोक से अपने अस्तित्व के खालीपन को भरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ज्यामिति को धोखा नहीं दिया जा सकता। तुम रेशम लपेट लो या चमड़ा, तुम्हारे अंदर का शोर कम नहीं होगा।
विसर्जन
अंततः, हम सब केवल डेटा पॉइंट्स हैं जो एक अदृश्य अक्ष (Axis) पर कांप रहे हैं। कोई ‘बड़ा चित्र’ नहीं है, कोई ‘मंजिल’ नहीं है। बस एक अंतहीन गणना है जो तब तक चलती रहेगी जब तक तुम्हारी उपयोगिता शून्य नहीं हो जाती। इसलिए अपनी ‘ग्रोथ माइंडसेट’ की बकवास को अपनी जेब में रखो। इस ब्रह्मांडीय बही-खाते में, तुम्हारा होना या न होना, केवल एक राउंडिंग एरर (Rounding Error) के बराबर है। वेटर, बिल लाओ।

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