मजदूरी की ज्यामिति

मजदूरी की ज्यामिति: एन्ट्रापी, पसीना और गणितीय झूठ

जिस कंक्रीट के वातानुकूलित पिंजरे को तुम ‘दफ्तर’ कहते हो, वह असल में एक गणितीय वधशाला है। यहाँ तुम्हारी आत्मा की हत्या किसी हथियार से नहीं, बल्कि ‘इन्फॉर्मेशन ज्योमेट्री’ (Information Geometry) के अदृश्य और निर्दयी नियमों से की जाती है। तुम सोचते हो कि तुम ‘कैरियर’ बना रहे हो? नहीं, तुम केवल एक ‘स्टेटिस्टिकल मैनिफोल्ड’ (Statistical Manifold) पर रेंगने वाले एक डेटा-पॉइंट हो, जो अपनी ही एन्ट्रापी (Entropy) से लड़ते हुए दम तोड़ रहा है।

पेट की भूख और एलगोरिदम का तमाशा

समाज ने तुम्हें सिखाया है कि पसीना बहाना एक नैतिक कर्तव्य है। ‘परिश्रम ही सफलता की कुंजी है’—यह सदी का सबसे बड़ा स्कैम है। भौतिक विज्ञान की नज़र से देखो तो तुम्हारा तथाकथित ‘परिश्रम’ केवल ऊष्मा गतिकी (Thermodynamics) की बर्बादी है। जब तुम सुबह की उमस भरी मेट्रो या बस में धक्के खाते हुए, किसी सड़े हुए सैंडविच की तरह पिचक कर ऑफिस पहुँचते हो, तो तुम दुनिया नहीं बदल रहे होते। तुम बस अपनी जैविक ऊर्जा को जलाकर कुछ बेतुके एक्सेल सेल्स को रंग रहे होते हो।

इसे एक पुरानी दिल्ली के हलवाई के उदाहरण से समझो। वह कड़ाही के सामने खड़ा है, तेल खौल रहा है, पसीना टपक रहा है। उसे ‘रीमानियन मेट्रिक’ (Riemannian Metric) का ‘र’ भी नहीं पता, लेकिन उसके हाथ का हर मूवमेंट एक ‘शॉर्टेस्ट जियोडेसिक’ (Shortest Geodesic) है। यानी, वह उस ‘इन्फॉर्मेशन स्पेस’ में न्यूनतम दूरी तय कर रहा है। वह सोच नहीं रहा; उसका दिमाग अब एक अनुकूलित मशीन बन चुका है। तुम और वह हलवाई एक ही हैं—फर्क सिर्फ इतना है कि वह समोसे तल रहा है और तुम अपना भविष्य। जिसे तुम ‘अनुभव’ (Experience) कहते हो, वह असल में तुम्हारी सोचने की क्षमता का क्षरण है। तुमने उस ‘मैनिफोल्ड’ के टेढ़े-मेढ़े रास्तों को रट लिया है ताकि तुम्हारे दिमाग को दर्द न हो। यह कुशलता नहीं, यह मानसिक पक्षाघात है।

फिशर का फंदा और खाली जेब का दर्द

अब जरा उस ‘फिशर इन्फॉर्मेशन मैट्रिक्स’ (Fisher Information Matrix) की बात करें, जिसे समझने की औकात तुम्हारे मैनेजर की कभी नहीं होगी। यह मैट्रिक्स असल में तुम्हारे डर और अयोग्यता का नक्शा है। जब तुम नौकरी में नए होते हो, तो यह मैट्रिक्स ऊबड़-खाबड़ पहाड़ जैसा होता है। हर ईमेल भेजने में तुम्हें उतना ही पसीना आता है जितना पहली बार ससुराल में बात करने पर। यह ‘कर्वचर’ (Curvature) तुम्हारी पीड़ा है।

लेकिन जैसे-जैसे तुम इस नरक के आदी होते हो, यह मैट्रिक्स ‘फ्लैट’ होने लगता है। और इस सपाटपन को तुम ‘प्रोफेशनलिज्म’ का नाम देते हो। लेकिन इस प्रक्रिया में तुम्हारी रीढ़ की हड्डी का जो हाल होता है, उसका क्या? तुम अपनी शारीरिक टूट-फूट को छिपाने के लिए बाज़ार में मौजूद सबसे महंगे कचरे की शरण में जाते हो। इसी Herman Miller Aeron को देख लो। इसकी कीमत तुम्हारे तीन महीने के राशन और मकान मालिक की गालियों के बराबर है। तुम इसे खरीदते हो, यह सोचकर कि इसका ‘एर्गोनॉमिक’ डिज़ाइन तुम्हारी रूह के घावों को भर देगा। जालीदार पीठ और लम्बर सपोर्ट… क्या मजाक है! यह कुर्सी तुम्हें आराम देने के लिए नहीं, बल्कि तुम्हें डेस्क पर ज्यादा देर तक जिंदा रखने के लिए बनाई गई है, ताकि कंपनी तुम्हारी बची-खुची जवानी भी निचोड़ सके। तुम जितने ज्यादा ‘कुशल’ होते हो, सिस्टम तुम्हें उतना ही ज्यादा चूसता है, और तुम बदले में उतनी ही महंगी कुर्सियाँ खरीदकर खुद को तसल्ली देते हो।

शून्य की तरफ बढ़ते कदम

कुशलता का अंतिम लक्ष्य ‘शून्य प्रयास’ (Zero Effort) है। सुनने में यह मोक्ष जैसा लगता है, लेकिन कॉर्पोरेट जगत में इसका मतलब है—रोबोट बन जाना। गणितीय भाषा में, ‘शॉर्टेस्ट जियोडेसिक’ वह रास्ता है जहाँ प्रतिरोध न्यूनतम हो। जीवन में इसका मतलब है—वह रास्ता जहाँ तुम बिना सवाल उठाए, बिना सोचे, बॉस की हर बात पर सिर हिलाते हुए महीने के अंत तक पहुँच जाओ।

लोग कहते हैं ‘संघर्ष’ से चरित्र बनता है। बकवास। गणित कहता है कि संघर्ष एक ‘एरर टर्म’ (Error Term) है। यदि तुम काम करते हुए थक रहे हो, तो इसका मतलब है कि तुम्हारी ज्यामिति अभी भी बिगड़ी हुई है। तुम उस ‘सिग्नल-टू-नॉइज़ रेश्यो’ में केवल ‘नॉइज़’ हो। एक आदर्श कर्मचारी वह है जो मर चुका है, बस उसकी उंगलियां चल रही हैं।

तो जाओ, अपनी उस भड़कीली आरजीबी लाइट वाली Mechanical Keyboard पर उंगलियां पटको। उसकी ‘खट-खट’ की आवाज़ तुम्हें यह झूठा एहसास दिलाती रहेगी कि तुम कुछ उत्पादक कर रहे हो। असलियत में, तुम बस ब्रह्मांड की एन्ट्रापी बढ़ा रहे हो और अपनी जेब हल्की कर रहे हो। यह सब डेटा का एक खेल है, और तुम उसमें केवल एक ‘राउंडिंग एरर’ हो।

अब यहाँ से दफा हो जाओ, मेरा सिर दर्द कर रहा है।

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