ज्यामितीय पाखंड

सांख्यिकीय नर्क और बासी समोसे

कल रात के बासी तेल में तले हुए समोसे ने मेरे पेट में जो गदर मचाया है, वह तुम्हारी इन खोखली ‘कॉर्पोरेट रणनीतियों’ से कहीं ज्यादा प्रामाणिक है। इस ठंडी होती चाय की तरह, तुम्हारा यह तथाकथित ‘करियर’ और ‘स्किल डेवलपमेंट’ भी एक गंदले नाले जैसा है जिसमें तुम तैरने का अभिनय कर रहे हो। तुम लोग ‘इंफॉर्मेशन ज्योमेट्री’ (Information Geometry) के भारी-भरकम शब्दों का चोला ओढ़कर खुद को ज्ञानी समझते हो, लेकिन हकीकत में तुम एक विशाल ‘सांख्यिकीय मैनिफोल्ड’ (Statistical Manifold) नाम के कूड़ेदान में थोड़ा कम सड़ा हुआ जूठन तलाश रहे हो।

मजदूरी और एन्ट्रापी का तमाशा

जब तुम सीना तानकर कहते हो कि “मैं अपने काम में माहिर हो गया हूँ”, तो इसका वैज्ञानिक अनुवाद यह है कि तुम्हारे दिमाग के न्यूरॉन्स घर्षण से घिस चुके हैं और तुम्हारी बची-खुची मौलिकता मर चुकी है। तुम अब एक ‘प्रेडिक्टेबल गियर’ (predictable gear) हो, इससे ज्यादा कुछ नहीं। किसी नए इंटर्न का एक्सेल शॉर्टकट रटना बुद्धिमत्ता का विकास नहीं है। यह सिर्फ इनपुट के बदले आउटपुट के ‘प्रोबेबिलिटी डिस्ट्रीब्यूशन’ (Probability Distribution) को सिकोड़ने की एक नीरस प्रक्रिया है, ताकि कंपनी नामक विशालकाय मशीन तुम्हें एक पालतू जानवर की तरह आसानी से हांक सके। इसे ‘सीखना’ कहना ठीक वैसा ही है जैसे एक्सपायर्ड दूध के पैकेट पर ‘प्रीमियम खट्टा दही’ का लेबल चिपकाना—यह शुद्ध धोखाधड़ी है।

इंसान नाम का यह हार्डवेयर, जो बग्स (bugs) से भरा पड़ा है, जब ‘फिशर इंफॉर्मेशन’ (Fisher Information) यानी दक्षता के पीछे भागता है, तो वह उस पुराने स्मार्टफोन जैसा दिखता है जिसकी बैटरी 1% बची है, फिर भी वह 4K वीडियो चलाने की जिद कर रहा है। तुम्हारी यह दिन-रात की मजदूरी और कुछ नहीं, बस उस आखिरी 1% ऊर्जा को कितनी बेदर्दी और पीड़ा के साथ जलाया जा सकता है, इसका एक थर्मोडायनामिक तमाशा है। तुम एन्ट्रापी घटाने का भ्रम पाल रहे हो, जबकि तुम केवल अपनी ही जैविक ऊर्जा को धुएं में उड़ा रहे हो।

वक्रता और सरकारी दफ्तर

तुम्हें ‘रीमानियन मैनिफोल्ड’ (Riemannian Manifold) की वक्रता समझनी है? तो गणित की किताबें बंद करो और मई की दोपहरी में किसी सरकारी दफ्तर की लाइन में लग जाओ, जहाँ पंखा भी रेंग रहा हो और क्लर्क का लंच टाइम कभी खत्म न होता हो। वहाँ तुम्हें जो महसूस होगा, वह सुंदर ज्यामिति नहीं, बल्कि आत्मा को छील देने वाली ‘निराशा की वक्रता’ है। जिस रास्ते को तुम सफलता की सीढ़ी या ‘जियोडेसिक’ (Geodesic) कहते हो, वह कभी सीधा नहीं होता। वह तुम्हारे बॉस के मूठ, सहकर्मियों की जलती हुई ईर्ष्या, और बाजार के उन ट्रेंड्स से बुरी तरह ऐंठा हुआ है जो कल सुबह तक कचरा हो जाएंगे।

जब एक औसत क्लर्क सोचता है कि वह शॉर्टकट लेकर आगे बढ़ जाएगा, तो असल में वह इस टेढ़े-मेढ़े स्पेस-टाइम में खुद को और गहरी खाई में धकेल रहा होता है। यह एक ऐसा सांख्यिकीय दलदल है जहाँ तुम जितना हाथ-पैर मारोगे, ‘थर्मोडायनामिक्स’ के नियमों के तहत उतनी ही तेजी से बर्बाद होगे। तुम इस अदृश्य ज्यामितीय दबाव से बचने के लिए बाज़ार में उपलब्ध महंगे एर्गोनोमिक उपकरणों की शरण लेते हो। तुम्हें लगता है कि डेढ़ लाख की जालीदार प्लास्टिक और एल्युमीनियम की कुर्सी पर बैठकर तुम्हारी रीढ़ की हड्डी बच जाएगी? यह डूबती हुई नाव में सोने की कील ठोकने जैसा भद्दा मजाक है। तुम्हारी पीठ नहीं टेढ़ी हो रही है, यह पूरा सिस्टम ही तुम्हें तोड़ने के लिए एक जटिल चाप (arc) में मुड़ा हुआ है। फ्लोरोसेंट लाइट की वह भिनभिनाती हुई आवाज, सस्ते कॉफी मशीन की बदबू, और अंतहीन मीटिंग्स का शोर—ये सब उस मैनिफोल्ड के टेक्सचर हैं जो तुम्हारी चेतना को घिस रहे हैं। तुम इस वक्रता के गुलाम हो, और कोई भी गद्देदार गद्दी तुम्हें इस गणितीय सत्य से नहीं बचा सकती।

शून्य की ओर दौड़

और अंत में क्या होता है? जब तुम उस जियोडेसिक के आखिरी छोर पर पहुँचते हो, जब तुम्हारा ‘केएल डाइवर्जेंस’ (KL Divergence) शून्य हो जाता है। बधाई हो, अब तुम इंसान नहीं रहे। तुम एक ‘डिटरमिनिस्टिक फंक्शन’ (deterministic function) बन चुके हो। इनपुट डालो, आउटपुट लो। न कोई भावना, न कोई विचलन, न कोई शोर। तुम पूर्ण हो गए हो, यानी तुम मर चुके हो। तुम्हारी सारी मेहनत, सारी रातें जो तुमने पीपीटी बनाने में काली कीं, वो सब ‘सूचना के नुकसान’ (Information Loss) के खाते में चली गईं। बचा क्या? एक ऐसा खोखला ढांचा जो 9 से 5 के बीच बिना लडखडाए चलता है।

हम सब एक गॉसियन नॉइज़ (Gaussian Noise) के बवंडर में फंसे हैं। जिसे तुम अपनी ‘पहचान’ या ‘नेटवर्किंग’ कहते हो, वह इस मैनिफोल्ड पर जमी धूल की एक परत भर है। अब बस करो। मेरे सिर में दर्द हो रहा है और यह चाय पूरी तरह ठंडी हो चुकी है। अपनी फाइलों में लौटो और कल सुबह फिर उसी वक्र रेखा पर रेंगना शुरू करो, जहाँ मंजिल भी शून्य है और हासिल भी शून्य।

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