पसीने का गणित और ठंडी चाय
विश्वविद्यालय के पीछे वाली उस जर्जर टपरी पर बैठकर जब मैं अपनी ‘कटिंग’ की आखिरी घूँट भरता हूँ, तो सामने खड़ी उस विशाल कांच की इमारत को देखकर एक अजीब सी वितृष्णा होती है। वहाँ अंदर जो लोग बैठे हैं, वे खुद को ‘मानव संसाधन’ (Human Resources) कहते हैं। कितना प्यारा और मासूम शब्द है न? जैसे कि वे कोई कोयला या कच्चा तेल हों, जिसे जलाकर उस कंपनी की तिजोरी को गर्म रखा जा रहा है। हम जिसे ‘पवित्र श्रम’ कहते हैं, वह ब्रह्मांडीय ऊष्मा-गतिकी (Thermodynamics) की दृष्टि में केवल एन्ट्रॉपी बढ़ाने का एक भद्दा तरीका है। चाहे वह तपती धूप में पैडल मारता रिक्शावाला हो या वातानुकूलित कमरे में कीबोर्ड पर उंगलियां पटकता हुआ डेटा एनालिस्ट—दोनों ही असल में ब्रह्मांड की अव्यवस्था को बढ़ा रहे हैं और इसे ‘करियर’ का नाम दे रहे हैं। यह सब एक सांख्यिकीय शोर है, जिसे हम अपनी महत्ता सिद्ध करने के लिए ‘काम’ कहते हैं।
हड्डी का दर्द और कुर्सी का धोखा
जिसे तुम ‘मेहनत’ समझते हो, वह असल में तुम्हारे शरीर द्वारा किया गया एक असफल विद्रोह है। न्यूरोसाइंस की रूखी भाषा में कहें तो तुम्हारा दिमाग केवल ‘प्रेडिक्शन एरर’ (Prediction Error) को पाटने की कोशिश कर रहा है, और इस प्रक्रिया में तुम अपनी रीढ़ की हड्डी को उस ज्यामिति में मोड़ रहे हो जिसके लिए वह बनी ही नहीं थी। फिर तुम अपनी उस कमाई का एक बड़ा हिस्सा एक विशेष रूप से डिजाइन की गई एर्गोनोमिक रीढ़-रक्षक कुर्सी खरीदने में लगा देते हो। यह कुर्सी, जो किसी अंतरिक्ष यान की सीट जैसी दिखती है, तुम्हें ठीक नहीं करती; यह तुम्हें केवल उस ‘आरामदायक नरक’ में टिके रहने की क्षमता देती है ताकि तुम और अधिक देर तक अपना शोषण करवा सको। यह वैसा ही है जैसे फोन की बैटरी मर रही हो और तुम उसे आग पर तपाकर आखिरी कॉल करने की कोशिश कर रहे हो। तुम उस कुर्सी पर बैठकर सोचते हो कि तुम सिस्टम को मात दे रहे हो, जबकि असल में तुम उस कुर्सी के डिजाइन का एक जैविक घटक मात्र बनकर रह गए हो। पागलपन है यह, और हम इसे ‘प्रोफेशनल लाइफस्टाइल’ कहते हैं।
गणना के राक्षस की वक्रता
अब वह ‘अदृश्य गणक’ (Calculation Monster) हमारे बीच आ चुका है—हाँ, वही जिसे तुम लोग दो अक्षरों के फैशनेबल नाम से बुलाते हो और मैं उसे ‘सांख्यिकीय दानव’ कहता हूँ। उसने श्रम के मैदान को समतल से बदलकर एक जटिल ‘मैनीफोल्ड’ (Manifold) बना दिया है। पुरानी दुनिया में श्रम रेखीय था—दौड़ो तो पहुँचोगे। लेकिन इस नई ‘सूचना ज्यामिति’ (Information Geometry) में, सतह वक्र है। यहाँ ‘फिशर सूचना’ का घनत्व यह तय करता है कि तुम्हारी मेहनत का कोई मूल्य है या नहीं। यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई चालाक दुकानदार सड़े हुए टमाटरों को ताजे पानी से धोकर तुम्हें बेच दे और तुम उसे ‘ताजगी’ समझ लो।
इस वक्रता में, तुम्हारी ‘कड़ी मेहनत’ का मूल्य शून्य हो सकता है यदि तुम सांख्यिकीय ढलान के गलत तरफ खड़े हो। अपनी प्रासंगिकता के भ्रम को बनाए रखने के लिए तुम अपनी मेज पर एक महंगा, इटालियन चमड़े का हस्तनिर्मित डेस्क पैड सजाते हो। तुम्हें लगता है कि यह मृत जानवर की खाल तुम्हें डिजिटल बाढ़ से बचा लेगी? यह डेस्क पैड उस ‘गणना के राक्षस’ के लिए महज एक और सतह है, और तुम्हारे लिए एक महंगी प्रार्थना की चटाई, जिस पर बैठकर तुम उन एल्गोरिदम की दया की भीख मांगते हो जिन्हें तुम्हारी थकान से कोई लेना-देना नहीं है। तुम बस एक गर्म कड़ाही में पड़े पकोड़े हो जो धीरे-धीरे अपनी नमी खो रहा है, और तुम इसे ‘अनुभव’ कहते हो।
सार्वजनिक सड़न का सौंदर्यशास्त्र
लोग कहते हैं कि व्यापार अब ‘सार्वजनिक’ हो गया है। मेरा मन करता है कि उनके मुँह पर हँसूँ। इसका मतलब यह नहीं है कि समाज का भला हो रहा है; इसका मतलब है कि तुम्हारी निजी पीड़ा अब सार्वजनिक डेटा का हिस्सा है। तुम्हारी हर झुंझलाहट, हर अधूरी नींद, और हर हताशा एक विशाल ‘संभाव्यता वितरण’ (Probability Distribution) का एक नगण्य बिंदु है। जिसे तुम अपनी ‘निजी डेस्क’ कहते हो, वह असल में उस सार्वजनिक ज्यामिति का एक कोना है जहाँ तुम्हारी निजता की नीलामी हो रही है।
तुम्हारी मेज पर रखा वह भारी नक्काशीदार पीतल का पेपरवेट—क्या तुम्हें सच में लगता है कि वह कागजों को उड़ने से रोकने के लिए है? नहीं, मेरे दोस्त। वह तुम्हारी उन दबी हुई चीखों को थामे रखने के लिए है जो इस गणितीय शोरगुल में कहीं खो गई हैं। वह पेपरवेट तुम्हारी स्थिरता का प्रतीक नहीं, तुम्हारी मानसिक जड़ता का स्मारक है। हम सब एक ऐसे समीकरण में बदल चुके हैं जहाँ ‘मानवीय’ होना एक ‘बग’ (Bug) है जिसे अगले अपडेट में ठीक कर दिया जाएगा। हम उस वक्रता पर फिसल रहे हैं, और नीचे केवल अंधकार है। चाय ठंडी हो गई है, और यह दुनिया भी।

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