एन्ट्रॉपी का दास

श्रम की ऊष्मागतिकी और अस्तित्व का कबाड़खाना

पिछली बार जब किसी ने मेरे सामने ‘एफिशिएंसी’ (Efficiency) शब्द का इस्तेमाल किया, तो मेरा मन किया कि उसके मुंह पर थूक दूं। जिसे आप कॉर्पोरेट जगत की ‘वैल्यू क्रिएशन’ कहते हैं, वह असल में रात के दो बजे दादर स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर बिखरी हुई किसी शराबी की उल्टी से ज्यादा कुछ नहीं है। बदबूदार, अनचाही, और पूरी तरह से सिस्टम की गड़बड़ी का परिणाम। हम सब बस इस गंदगी को साफ करने का नाटक कर रहे हैं और इसे ‘करियर’ का नाम दे रहे हैं।

मांस पीसने की मशीन (The Meat Grinder)

सुनिए, आप जो रोज सुबह लोकल ट्रेन के धक्कों में अपनी पसलियां तुड़वाते हुए, पसीने से लथपथ होकर ऑफिस पहुंचते हैं, वह कोई ‘सफलता’ की यात्रा नहीं है। वह ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के दूसरे नियम के खिलाफ लड़ी जा रही एक हारी हुई लड़ाई है। इल्या प्रिगोगिन ने जिसे ‘विक्षेपी संरचना’ (Dissipative Structure) कहा था, वह कोई सुंदर व्यवस्था नहीं है। यह एक विशालकाय बॉयलर है, जो आपके ताजे समय, जवानी और जीवित आत्मा को ईंधन के रूप में निगलता है और बदले में ‘मीटिंग्स’ नाम की जहरीली गैस बाहर छोड़ता है।

एक संगठन (Organization) तभी तक जीवित रहता है जब तक वह आपके अंदर की ऊर्जा को चूसकर बाहर ब्रह्मांड में अव्यवस्था (Entropy) फैलाता रहता है। सड़क किनारे मिलने वाला वह वड़ा-पाव, जिसमें स्वाद के नाम पर केवल तीखी लाल चटनी होती है, आपके पेट में जाकर जो तबाही मचाता है, ठीक वही हाल ‘कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर’ आपके नर्वस सिस्टम का करता है। जिसे आप ‘बर्नआउट’ कहते हैं, वह असल में थर्मल ओवरलोड है।

सुविधाजनक बेड़ियां

जब आप अपनी उस Herman Miller की कुर्सी में धंसते हैं, जिसे एर्गोनॉमिक्स का चमत्कार कहा जाता है, तो गलतफहमी में मत रहिए। वह आराम के लिए नहीं है। वह एक वैज्ञानिक ‘शिकंजा’ (Restraint) है, जिसे इसलिए डिजाइन किया गया है ताकि आपकी रीढ़ की हड्डी पूंजीवाद के बोझ तले चरमराते हुए भी काम करती रहे। यह कुर्सी आपको कुशलता से निचोड़ने का यंत्र है। आपकी ऊर्जा का 90% हिस्सा बेकार की रिपोर्ट्स बनाने, क्लाइंट्स को झूठी तसल्ली देने और बॉस की चापलूसी में खर्च होकर, ब्रह्मांड में व्यर्थ गर्मी (Waste Heat) बनकर उड़ जाता है।

जैविक त्रुटियां (Biological Bugs)

और यह ‘मोटिवेशन’? हा! यह उस पंखे की घरघराहट जैसा है जो जलने से ठीक पहले आवाज करता है। जब प्रोजेक्ट पूरा होने पर आपको खुशी महसूस होती है, तो वह केवल डोपामाइन नाम का सस्ता नशा है जो सिस्टम की खराबी को छुपा रहा है। एक कर्मचारी का वफादार होना उतना ही बेतुका है जितना कि एक स्मार्टफोन की बैटरी का चार्जर से ‘प्यार’ करना। आप केवल आयनों (Ions) का आदान-प्रदान कर रहे हैं ताकि कबाड़ में फेंकने से पहले आपको पूरी तरह निचोड़ा जा सके।

आप ‘निगेटिव एन्ट्रॉपी’ (Negative Entropy) को चुराने की कोशिश कर रहे हैं। आप जितनी शिद्दत से ऑफिस में एक्सेल शीट (Excel Sheet) को व्यवस्थित करते हैं, आपके घर में सिंक में पड़े झूठे बर्तनों और मेज पर पड़े अनपेड बिलों का ढेर उतना ही बढ़ता जाता है। व्यवस्था (Order) मुफ़्त नहीं आती; उसकी कीमत आपकी निजी ज़िंदगी की अराजकता (Chaos) से चुकानी पड़ती है। ब्रह्मांड का हिसाब एकदम पक्का है—कहीं न कहीं, किसी न किसी को टूटना ही पड़ता है। और वह ‘कोई’ हमेशा आप होते हैं।

सन्नाटे का शोर

शायद आप सोचते हैं कि शोरगुल से बचकर शांति मिल जाएगी। अपने Sony Noise Cancelling Headphones चढ़ा लीजिए और दुनिया को म्यूट कर दीजिए। क्या आपको शांति मिली? बिल्कुल नहीं। सन्नाटे की जगह आपको अपने ही दिमाग के न्यूरॉन्स के मरने की धीमी आवाज सुनाई देगी। शोर को शोर से काटने का यह ढोंग (Anti-waves) आधुनिक श्रम का असली चेहरा है। आप बाहर की आवाज़ बंद करते हैं ताकि अंदर का चीखता हुआ सन्नाटा सुन सकें, जो आपको यह याद दिलाता है कि आप धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं।

अंतिम गर्त

शाम को अपनी मेज पर पड़ी ठंडी कॉफी की सतह में झांककर देखिए। उसमें जो थका हुआ, उतरा हुआ चेहरा नज़र आता है, वही ‘अस्तित्वगत अलगाव’ (Existential Alienation) है। ‘सेल्फ-ऑर्गेनाइजेशन’ की बातें बकवास हैं। हम खुद को ‘ऑर्गनाइज़’ नहीं कर रहे, हम बस एक कबाड़खाने में तरतीब से सड़ने का इंतज़ार कर रहे हैं। आप एक इनपुट वेरिएबल हैं जो अंततः ‘मौत’ नामक संतुलन (Equilibrium) में विलीन हो जाएगा। हम सब उस रिक्शा वाले की तरह हैं जो मीटर डाउन करके सवारी का इंतज़ार कर रहा है, जबकि इंजन चालू है और पेट्रोल जल रहा है।

जाने दो, यहाँ उम्मीद की सड़ती हुई बदबू आ रही है। मुझे एक स्ट्रोंग कटिंग चाय की ज़रूरत है, वरना मैं यहीं उल्टी कर दूंगा।

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