श्रम ज्यामिति

कॉर्पोरेट दफ्तरों के वातानुकूलित पिंजरों में बैठकर जब लोग ‘करियर प्रोग्रेशन’ और ‘आत्म-विकास’ की बात करते हैं, तो वे असल में उस दीमक की तरह होते हैं जो लकड़ी के धीरे-धीरे खत्म होने को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि मानती है। यह जिसे तुम ‘स्किल’ या ‘हुनर’ कहते हो, वह किसी दैवीय प्रेरणा का परिणाम नहीं है; यह केवल सूचना ज्यामिति (Information Geometry) के एक सांख्यिकीय मैनिफोल्ड पर रेंगने वाला एक तुच्छ कीड़ा है जो कम से कम ऊर्जा में अपना पेट भरने का रास्ता ढूंढ रहा है। तुम्हारी पूरी हस्ती, तुम्हारे सपने, और तुम्हारी यह तथाकथित ‘प्रोफेशनल यात्रा’ केवल संभावनाओं के एक विशाल, रूखे गणितीय मॉडल में एक फीके पड़ते हुए बिंदु के समान है।

श्रम का वीभत्स भूगोल

इंसानी समाज ने ‘मेहनत’ को एक पवित्र शब्द बना दिया है ताकि उसे अपनी अंतहीन गुलामी पर शर्म न आए। लेकिन अगर तुम इसे भावनाओं के चशमे को उतारकर देखोगे, तो असलियत बेहद कुरूप है। तुम्हारा काम केवल उस ‘टास्क मैनिफोल्ड’ (Task Manifold) के भीतर की एक जियोडेसिक (Geodesic)—यानी दो बिंदुओं के बीच की न्यूनतम दूरी—तलाशना है। इसे ऐसे समझो जैसे तुम तपती दोपहर में एक सस्ते, मक्खियों से भरे ढाबे पर बैठे हो और यह हिसाब लगा रहे हो कि बासी रोटी के किस टुकड़े को खाने में सबसे कम मेहनत लगेगी।

जब तुम पहली बार कोई जटिल काम या नया सॉफ्टवेयर हाथ में लेते हो, तो तुम्हारा ‘फिशर सूचना मैट्रिक्स’ (Fisher Information Matrix) उतना ही बिखरा हुआ और अराजक होता है जितना कि पीक आवर्स में मुम्बई की लोकल ट्रेन के फर्श पर गिरा हुआ कचरा। तुम गिरते हो, टकराते हो, गलत बटन दबाते हो, और उस शोर (noise) में अपनी रही-सही मानसिक शांति खो देते हो। जिसे तुम बाद में गर्व से ‘अनुभव’ का नाम देते हो, वह वास्तव में तुम्हारे दिमाग की वह मजबूरी है जहाँ उसने अब नई गलतियाँ करना बंद कर दिया है—इसलिए नहीं कि तुम समझदार हो गए हो, बल्कि इसलिए कि उसके पास अब और थकने की ताकत नहीं बची।

तुम्हारी यह ‘कुशलता’ कोई महान उपलब्धि नहीं, बल्कि तुम्हारी आत्मा का वह संकुचन है जिसने तुम्हें एक पूर्व-निर्धारित सांचे में फिट कर दिया है। इस प्रक्रिया में तुम्हारी रीढ़ की हड्डी जो कीमत चुकाती है, उसे छिपाने के लिए तुम एर्गोनोमिक कुर्सी जैसी महंगी बैसाखियों का सहारा लेते हो। तुम उम्मीद करते हो कि यह जालीदार कपड़े और प्लास्टिक का ढांचा तुम्हारे शारीरिक पतन को रोक लेगा, पर याद रखना, डेढ़ लाख की कुर्सी तुम्हारी उस कंगाली को नहीं ढक सकती जो तुमने अपनी जिंदगी के घंटों के बदले खरीदी है।

निर्णय की न्यूनतम दूरी

सूचना ज्यामिति के इस क्रूर खेल में, ‘सटीक निर्णय’ लेना केवल वह छोटा और सुरक्षित रास्ता है जो तुम्हारी जेब खाली होने और काम खत्म होने के बीच मौजूद होता है। हम हर दिन ‘कुल्बैक-लीब्लर डाइवर्जेंस’ (Kullback-Leibler divergence) को कम करने का ढोंग करते हैं—यानी हम जहाँ हैं और हमें जहाँ होना चाहिए, उसके बीच के अंतर को पाटना। यह सुनने में वैज्ञानिक लगता है, लेकिन व्यवहार में तुम केवल उस धूर्त रिक्शेवाले की तरह हो जो सवारी से दस रुपये ज्यादा ऐंठने के लिए जानबूझकर लंबा रास्ता चुनता है, और आखिर में खुद भी उसी ट्रैफिक जाम में फंसकर रह जाता है।

इंसानी ‘क्रिएटिविटी’, ‘जुनून’ या ‘सहानुभूति’ उस फालतू के तड़के की तरह है जो सड़ी हुई दाल में डाला जाता है ताकि उसकी दुर्गंध छिप सके। एक शुद्ध तार्किक मशीन के लिए जो काम एक सीधी रेखा है, उसे तुम अपनी ‘भावनाओं’ के कारण एक उलझी हुई गुत्थी बना देते हो। ज्यामितीय दृष्टिकोण से, तुम्हारी भावनाएं केवल वह घर्षण (friction) हैं जो तुम्हारी उत्पादकता को चाट रही हैं। तुम सोचते हो कि तुम ‘स्मार्ट वर्क’ कर रहे हो, जबकि तुम केवल अपने मस्तिष्क के प्रोसेसर को उस बेकार के डेटा से जला रहे हो जिसका अंततः कोई मूल्य नहीं है।

बाजार तुम्हें यह विश्वास दिलाता है कि तुम विशेष हो, लेकिन तुम केवल एन्ट्रापी (Entropy) के खिलाफ एक हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हो। इस मानसिक जलन और बाहरी दुनिया के कोलाहल को शांत करने के लिए जब तुम नॉइज़-कैंसलिंग हेडफ़ोन अपने कानों पर चढ़ाते हो, तो तुम दुनिया से नहीं, बल्कि अपने अंदर की उस चीख से भाग रहे होते हो जो तुम्हें बार-बार तुम्हारी निरर्थकता की याद दिलाती है। यह सन्नाटा सुकून नहीं है, यह पलायन है।

सांख्यिकीय नरक की थकान

अंत में, हर कर्मचारी एक ‘बर्नआउट’ की स्थिति में पहुंचता है, जिसे समाज बड़ी सहानुभूति की नजर से देखता है और ‘ब्रेक’ लेने की सलाह देता है। लेकिन वैज्ञानिक रूप से, यह कोई बीमारी नहीं है; यह केवल तुम्हारे सिस्टम की वह सीमा है जहाँ डेटा का प्रवाह तुम्हारी सांख्यिकीय क्षमता (Statistical Capacity) से बाहर निकल गया है। तुम उस पुराने पड़ चुके स्मार्टफोन की तरह हो जिसकी बैटरी अब सिर्फ चार्जर पर ही जिंदा रहती है, और जिसे एक दिन कबाड़ में फेंक दिया जाएगा। तुम्हारा पूरा वजूद एक एक्सेल शीट की उन पंक्तियों में कैद है जिन्हें ‘हाइल्ड’ करके भुला दिया गया है।

कंपनियाँ तुम्हें ‘लीडरशिप’ का सपना दिखाएंगी, तुम्हें ‘टीम बिल्डिंग’ के नाम पर जोकर की तरह नचाएंगी। लेकिन उनका असली मकसद केवल तुम्हारी उस ज्यामितीय ‘कर्वेचर’ (curvature) को सीधा करना है ताकि वे तुम्हें एक मानकीकृत उत्पाद की तरह बाजार में बेच सकें। तुम कोई इंसान नहीं हो; तुम केवल एक सांख्यिकीय वितरण (Statistical Distribution) के किनारे पर पड़ी हुई वह धूल हो जिसे मंदी की हवा का एक झोंका कभी भी साफ कर सकता है। अब चुपचाप अपने काम पर लग जाओ और स्क्रीन को घूरते रहो, क्योंकि तुम्हारी राय की इस मैनिफोल्ड में कोई जगह नहीं है। तुम बस खत्म हो रहे हो।

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