भ्रम का गणित
पिछली बार जब हम उस सीलन भरे ढाबे के कोने में बैठे थे, जहाँ हवा में जलते हुए तेल और सस्ती सिगरेट का धुआँ एक साथ तैर रहा था, मैंने तुमसे कहा था कि ‘संघर्ष’ केवल तुम्हारे न्यूरॉन्स के बीच होने वाला एक रासायनिक शॉर्ट-सर्किट है। आज, जब मैं तुम्हें इस वातानुकूलित कंक्रीट के पिंजरे में, गले में ‘नेकटाई’ नाम का रेशमी फाँसी का फंदा बाँधे हुए देखता हूँ, तो वह बात और भी वीभत्स होकर सामने आती है। तुम जिसे अपना ‘करियर’ कहते हो, वह वास्तव में श्रम के प्रायिकता वितरण (probability distribution) की एक ऐसी नाली है, जहाँ तुम केवल एक बहते हुए कचरे के समान हो।
तुम्हें लगता है कि तुम पसीना बहाकर ब्रह्मांड में कोई ‘मूल्य’ जोड़ रहे हो? थर्मोडायनामिक्स की दृष्टि से, तुम केवल एंट्रॉपी बढ़ा रहे हो। एक सड़क किनारे ठेले पर बिकने वाला, इंजन ऑयल जैसे काले तेल में तला हुआ वह बासी समोसा और तुम्हारा यह तथाकथित ‘बौद्धिक श्रम’—दोनों का अंतिम परिणाम एक ही है: ऊष्मा का व्यर्थ उत्सर्जन और अंततः विस्मृति। तुम एक ऐसी मशीन के पुर्जे हो जो केवल शोर पैदा करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
सड़ी हुई ज्यामिति
सूचना ज्यामिति (Information Geometry) के चश्मे से देखें, तो तुम्हारी स्थिति दयनीय है। हम ‘फिशर सूचना’ (Fisher Information) की बात करते हैं—यह मापने का तरीका कि किसी सिस्टम के मापदंडों के बारे में तुम्हारा डेटा कितना ‘सच’ बताता है। कड़वा सच यह है कि तुम्हारा फिशर स्कोर शून्य की ओर लपक रहा है। यदि कल सुबह तुम किसी बस के नीचे आ जाओ और तुम्हारा अस्तित्व एक गीले धब्बे में बदल जाए, तो भी इस कॉरपोरेट मशीनरी के ‘मेनीफोल्ड’ (manifold) की वक्रता में रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ेगा। सिस्टम तुम्हें एक ‘राउंडिंग एरर’ मानकर आगे बढ़ जाएगा।
तुम अपने जिस ‘दशकों के अनुभव’ का ढोल पीटते हो, वह आज के बाजार में उस पुरानी, बिना चाबी की घड़ी जैसा है, जिसकी कीमत केवल नॉस्टेल्जिया के शोरूम में है, हकीकत की जमीन पर नहीं। सिलिकॉन की चिप्स पर दौड़ती दुनिया में, तुम्हारी एनालॉग कुशलताएँ उस घिसे हुए टायर की तरह सपाट हो चुकी हैं, जो अब सड़क से कोई घर्षण (friction) पैदा नहीं कर सकता। तुम बस फिसल रहे हो, और तुम्हें लग रहा है कि तुम दौड़ रहे हो। क्या तमाशा है।
स्वचालित वध
अब उस अदृश्य कसाई की बात करते हैं जिसे तुम ‘भविष्य’ कहते हो। जिसे तुम अपनी ‘सहज बुद्धि’ या ‘इंसानी स्पर्श’ मानकर छाती चौड़ी करते हो, वह सिलिकॉन के उन परजीवियों के लिए केवल एक उच्च-आयामी (high-dimensional) पैटर्न है, जिसे वे मिलीसेकंड्स में प्रोसेस कर सकते हैं। तुम्हारी चेतना, उस मांस के लोथड़े में कैद एक सुस्त एल्गोरिदम है जो बहुत अधिक कैलोरी जलाता है और बहुत कम आउटपुट देता है।
वह सीमा रेखा, जहाँ गणना (computation) तुम्हें निगल जाएगी, अब तुम्हारे पैरों के नीचे नहीं, बल्कि तुम्हारी गर्दन पर है। तुम जिसे ‘क्रिएटिविटी’ कहते हो, वह अब केवल एक सांख्यिकीय शोर (statistical noise) है जिसे अनुकूलन (optimization) की प्रक्रिया में छाँट दिया जाएगा। तुम उस महंगी एर्गोनोमिक कुर्सी पर बैठकर खुद को सुरक्षित महसूस करते हो? वह कुर्सी तुम्हारी रीढ़ की हड्डी को बचाने के लिए नहीं है; वह तो बस एक लाइफ-सपोर्ट सिस्टम है ताकि तुम जैसी ‘जैविक बैटरी’ से आखिरी बूंद तक ऊर्जा निचोड़ी जा सके।
सांख्यिकी (Statistics) में दया के लिए कोई कॉलम नहीं होता। यह एक ठंडा, निर्जीव वधशाला है जहाँ तुम्हारी भावनाओं को ‘आउटलायर’ मानकर खारिज कर दिया जाता है। तुम एक बड़े समीकरण में केवल एक चर (variable) हो, जिसका मान अब नगण्य हो चुका है। शराब पियो और सो जाओ, क्योंकि जागकर भी तुम केवल एक मृत डेटा-पॉइंट ही रहोगे।

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