संगठनात्मक सड़न

पिछली बार हम ट्रैफिक जाम में फंसे उस दयनीय इंसान पर हंस रहे थे जो क्लच दबाते हुए ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने का भ्रम पाल रहा था। आज आइए उस उससे भी भद्दे मजाक पर चर्चा करें जिसे आप ‘संगठन’ या ‘कंपनी’ कहते हैं। आप जिसे अपना ‘करियर’ कहकर सीना चौड़ा करते हैं, वह वास्तव में ऊष्मप्रवैगिकी (Thermodynamics) के दूसरे नियम के खिलाफ लड़ा जा रहा एक हारा हुआ युद्ध है। यह केवल ऊर्जा की बर्बादी है, भौतिक पतन को कुछ समय के लिए टालने का एक महंगा और बेतुका नाटक है।

अराजकता: बासी पिज्जा और बढ़ती अव्यवस्था

एक औसत कॉर्पोरेट ऑफिस की सुबह को ध्यान से देखिए। क्या आपको वहां कोई ‘व्यवस्था’ या ‘अनुशासन’ दिखाई देता है? बिल्कुल नहीं। वहां सिर्फ ‘एन्ट्रॉपी’ का नंगा नाच है। अगर मैं इसे और भी स्पष्ट और घिनौनी भाषा में कहूं, तो यह वैसा ही है जैसे रसोई में तीन दिन से खुला छोड़ा गया बासी खाना धीरे-धीरे सड़ रहा हो। लगातार बजते हुए चैट के नोटिफिकेशन, उन मिनट्स ऑफ मीटिंग का ढेर जिन्हें किसी ने पढ़ा तक नहीं है, और एयर कंडीशनर की कृत्रिम ठंडक में घुली हुई सस्ते इंस्टेंट कॉफी और मीटिंग रूम में बैठे अधेड़ उम्र के हताश कर्मचारियों के पसीने की बदबू।

आप लोगों को लगता है कि आप ‘मैनेजमेंट’ कर रहे हैं? असलियत यह है कि आप एक टूटे हुए सीवेज पाइप से बहते हुए गंदे पानी को चम्मच से उठाकर दूसरी बाल्टी में डाल रहे हैं। हर बार जब आप ‘सिंक-अप’ या ‘वीकली रिव्यू’ के नाम पर एक नई मीटिंग बुलाते हैं, तो आप सिस्टम के अंदर घर्षण पैदा करते हैं। यह घर्षण गर्मी पैदा करता है—बिल्कुल वैसी ही गर्मी जो गर्मियों में भरी हुई मुंबई लोकल ट्रेन में बगल वाले यात्री की चिपचिपी त्वचा से आपके शरीर में ट्रांसफर होती है। यह फालतू की गर्मी उस पैसे को भाप बना देती है जो मुनाफे में जाना चाहिए था, और उसे ‘ओवरटाइम’ और ‘गैस की गोलियों’ के बिल में बदल देती है। जिसे आप ‘कॉर्पोरेट विजन’ कहते हैं, वह आपके दिमाग में डोपामाइन केमिकल द्वारा पैदा किया गया एक छोटा सा ग्लिच है। यह उस भूखे आवारा कुत्ते जैसा है जो प्लास्टिक की हड्डी चबाते हुए यह सोचकर लार टपका रहा है कि उसे पौष्टिक भोजन मिल गया है।

संरचना: डूबती नाव में कुर्सी का खेल

अगर आपकी कंपनी अभी तक दिवालिया नहीं हुई है, तो इसका कारण यह नहीं है कि आपके लीडर्स ‘जीनियस’ हैं। भौतिकी की भाषा में, आपका संगठन एक ‘अपव्ययी संरचना’ (Dissipative Structure) है। यह एक ऐसा परजीवी ढांचा है जो अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए बाहर से लगातार ऊर्जा चूसता है। यह ऊर्जा कहां से आती है? उन भोले-भाले नए ग्राहकों से जिन्हें आप फंसाते हैं, और उन कॉलेज से निकले ताजा-तरीन युवाओं के खून से, जिन्हें अभी तक यह नहीं पता कि उनकी आत्मा का सौदा किया जा रहा है।

इस ढांचे को गिरने से बचाने के लिए भारी मात्रा में ‘नेगेटिव एन्ट्रॉपी’ की जरूरत होती है। यह शब्द सुनने में भारी-भरकम लगता है, लेकिन हकीकत में यह बहुत कुरूप है। इसका मतलब है अपने सहकर्मियों की टांग खींचना, अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरों के सिर फोड़ना, और खुद को ‘सही’ साबित करने के लिए एक्सेल शीट्स में आंकड़ों की बाजीगरी करना। यह वह गंदा ग्रीस है जो इस जंग लगी मशीन को चूँ-चूँ करते हुए भी चला रहा है।

और इस डूबते हुए जहाज के बीच, आप अपनी दयनीय स्थिति को सुधारने का क्या प्रयास करते हैं? आप एक महंगी एर्गोनोमिक कुर्सी खरीदते हैं। आप अपनी जेब से लाखों रुपये उस जालीदार नायलॉन और प्लास्टिक के ढांचे पर खर्च कर देते हैं, यह सोचकर कि यह आपके करियर को बचा लेगा। आप उस पर बैठकर खुद को एक महत्वपूर्ण ‘पुर्जा’ समझते हैं। लेकिन याद रखिए, वह कुर्सी आपकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए नहीं है। वह तो कसाईखाने में ले जाए जाने वाले पशु के लिए एक आरामदायक गद्दे की तरह है। यह केवल एक ‘लाइफ-सपोर्ट सिस्टम’ है जो आपकी रीढ़ की हड्डी को पूरी तरह से टूटने से बचाता है, ताकि आप सिस्टम से बाहर फेंके जाने से पहले कुछ और महीने कोल्हू के बैल की तरह काम कर सकें।

जुगाड़: टेप से चिपकाया गया गणितीय भ्रम

सच तो यह है कि जिसे आप ‘बिजनेस कंटिन्यूटी प्लान’ (BCP) कहते हैं, वह सड़क किनारे खड़े उस ठेले जैसा है जिसे जगह-जगह से टेप चिपकाकर जोड़ा गया है। जब तक पहिया घूम रहा है, तब तक सब ठीक लगता है; लेकिन जैसे ही गति रुकी, उस पर सिर्फ मक्खियां भिनभिनाती नजर आएंगी। गणितीय दृष्टिकोण से, आपकी सारी रणनीतियां एक ‘स्टोकेस्टिक प्रक्रिया’ यानी जुआ हैं।

जब कोई मैनेजर ‘सिनर्जी’, ‘पैराडाइम शिफ्ट’ या ‘वैल्यू क्रिएशन’ जैसे शब्दों की उल्टी करता है, तो समझिए कि सिस्टम का पाचन तंत्र खराब हो चुका है। ये शब्द ज्ञान नहीं हैं; ये वो मानसिक कचरा है जो पच नहीं पाया और अब मुंह के रास्ते बाहर आ रहा है। सूचना ज्यामिति (Information Geometry) कहती है कि एक लीडर का काम शोर (Noise) को कम करना है, लेकिन आपके बॉस शोर की फैक्ट्री हैं। वे खुद कन्फ्यूजन पैदा करते हैं और फिर उसे सुलझाने का नाटक करके अपनी तनख्वाह को जायज ठहराते हैं। मीटिंग रूम में उनकी मृत मछली जैसी पथराई हुई आंखों को देखें—वहां जीवन नहीं, सिर्फ प्रक्रिया का पालन है।

अंततः, हम सब एक विशालकाय थर्मल इंजन के भीतर बहने वाला कूलेंट (Coolant) लिक्विड मात्र हैं। हम उच्च दबाव से निम्न दबाव की ओर, जीवन से मृत्यु की ओर, और सैलरी क्रेडिट होने के एसएमएस से लेकर क्रेडिट कार्ड के बिल तक बेबस होकर बह रहे हैं। ब्रह्मांड को आपकी महत्वाकांक्षाओं से कोई लेना-देना नहीं है; वह बस उस बेकार गर्मी को सोख रहा है जो आप पैदा कर रहे हैं। जिस दिन यह ब्रह्मांड एक बड़ी उबासी लेगा, आपकी फाइलों, आपकी मीटिंग्स और आपकी उस महंगी कुर्सी के साथ सब कुछ एक पल में राख हो जाएगा। यही आपकी तथाकथित सफलता का असली चेहरा है।

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