उष्मागतिक कचरा

श्रम की सड़ांध

कॉर्पोरेट जगत के कांच के पिंजरों में बंद यह जो ‘हसल कल्चर’ (Hustle Culture) का तमाशा चल रहा है, यह आधुनिक युग का सबसे बड़ा धोखा है। लोग समझते हैं कि वे ‘करियर’ नामक किसी भव्य इमारत का निर्माण कर रहे हैं, जबकि असल में वे केवल अपनी जैविक मशीनरी को एक धीमी और क्रूर आग में झोंक रहे हैं। सुबह की वह कड़वी और सस्ती कॉफी, जिसे आप ‘फ्यूल’ मानकर अपने गले से नीचे उतारते हैं, वह ऊर्जा का स्रोत नहीं है; वह आपके तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को दिया जाने वाला एक बिजली का झटका है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे एक पुरानी एम्बेसडर कार को बिना इंजन ऑयल के हिमालय पर चढ़ाने की कोशिश करना—रेडिएटर फटेगा, धुआं निकलेगा, और अंततः सब कुछ कबाड़ हो जाएगा।

संगठनों में जिसे ‘डेटा-ड्रिवन निर्णय’ कहा जाता है, वह असल में सूचनाओं का एक बदबूदार ढेर है। एक कर्मचारी की मेज पर फाइलों का अंबार और इनबॉक्स में हजारों बिना पढ़े ईमेल्स—यह सब उस ‘एन्ट्रॉपी’ (Entropy) का भौतिक प्रमाण है जिसे हम गलती से ‘प्रगति’ का नाम देते हैं। यह प्रक्रिया ठीक वैसी ही है जैसे किसी सड़क किनारे के ढाबे में एक ही तेल में हफ्तों तक समोसे तलते रहना। तेल काला पड़ता जाता है, उसमें कार्बन जमा होता जाता है, और अंत में वह जहर बन जाता है। हमारा दिमाग भी सूचनाओं के इसी काले तेल में डूबा हुआ है। जितना अधिक आप डेटा को रगड़ेंगे, उतना ही अधिक घर्षण (Friction) पैदा होगा, और आपकी बुद्धि उस पुरानी घिसी हुई चप्पल की तरह पतली हो जाएगी जो किसी भी मोड़ पर जवाब दे सकती है।

उष्मागतिकी का क्रूर सत्य

यहाँ हमें किसी मोटिवेशनल स्पीकर की बकवास नहीं, बल्कि रोल्फ लैंडुअर (Rolf Landauer) के उस कड़वे सिद्धांत को याद करना चाहिए, जिसे आज का मैनेजमेंट कभी स्वीकार नहीं करेगा। उष्मागतिकी (Thermodynamics) का दूसरा नियम कोई दार्शनिक विचार नहीं है; यह आपकी जेब पर पड़ने वाली बिजली के बिल की तरह एक कठोर वास्तविकता है। लैंडुअर का सिद्धांत स्पष्ट करता है कि सूचना को ‘मिटाना’ (Erase) मुफ़्त नहीं है। ब्रह्मांड में कुछ भी मुफ्त नहीं है। जब आप अपने दिमाग से किसी फालतू क्लाइंट की बदतमीजी या किसी बेमतलब की मीटिंग की याद को मिटाने की कोशिश करते हैं, तो आपका भेजा गर्म होता है। भौतिकी की भाषा में, एक बिट (bit) जानकारी को नष्ट करने के लिए कम से कम $kT \ln 2$ ऊर्जा ऊष्मा के रूप में विसर्जित करनी पड़ती है।

यह गर्मी वैसी ही है जैसे जून की दोपहर में बिना एसी की खटारा बस में सफर करते समय इंजन के ठीक ऊपर वाली सीट पर बैठने से महसूस होती है। आपका दिमाग कोई सुपरकम्प्यूटर नहीं है; यह मांस और खून का बना एक गीला प्रोसेसर है, जो अपनी ही गर्मी में उबल रहा है। हम सोचते हैं कि हम विचार कर रहे हैं, जबकि हम केवल अपने न्यूरॉन्स को जला रहे हैं।

नींद: गंदे नाले की सफाई

जिसे कवि और लेखक ‘नींद’ कहकर महिमामंडित करते हैं, वह असल में आपके खोपड़ी के भीतर चल रहा एक घिनौना सफाई अभियान है। दिन भर की फिजूल की जानकारी—वह इंस्टाग्राम रील जिसे आपने दो सेकंड देखा, वह विज्ञापन जो जबरदस्ती थोपा गया—यह सब आपके सिनैप्स (Synapses) के बीच किसी गंदे नाले के कीचड़ की तरह जमा हो जाता है। नींद वह समय है जब मस्तिष्कमेरु द्रव (Cerebrospinal fluid) आपके मस्तिष्क की गलियों में बहता है और उन जहरीले प्रोटीनों को धोकर बाहर निकालता है।

यदि आप नहीं सोएंगे, तो यह कीचड़ सड़ेगा और आपके सोचने की शक्ति को वैसे ही जाम कर देगा जैसे बाल और साबुन का झाग मिलकर बाथरूम की नाली को चोक कर देते हैं। विडंबना यह है कि लोग इस जैविक कचरे से निपटने के लिए भौतिकी को समझने के बजाय बाजारवाद की शरण में जाते हैं। वे अत्यधिक महंगे और दिखावटी आर्थोपेडिक गद्दों पर लाखों लुटा देते हैं, मानो रेशम की चादर बिछाने से उनके दिमाग की सड़ांध कम हो जाएगी या गुरुत्वाकर्षण का नियम बदल जाएगा। यह केवल उन अमीरों का ढोंग है जो अपनी आंतरिक अशांति को ‘मेमोरी फोम’ के नीचे दबाना चाहते हैं। लेकिन याद रखें, मखमल के गद्दे पर लेटने से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की दुर्गंध नहीं जाती।

विस्मृति का नरक

आधुनिक आर्किटेक्चर, चाहे वह सिलिकॉन का हो या कार्बन का, उसकी सबसे बड़ी दुश्मन ‘याददाश्त’ ही है। जो मशीन या जो इंसान सब कुछ याद रखने की जिद करता है, वह अंततः एक कबाड़खाने में तब्दील हो जाता है। ‘एक्टिव फॉरगेटिंग’ (Active Forgetting) कोई विकल्प नहीं, बल्कि जीवित रहने की शर्त है। जिस तरह एक भरे हुए पेट के बाद उल्टी किए बिना नया खाना संभव नहीं, उसी तरह नए डेटा के लिए पुरानी यादों की बलि देना जरूरी है। जिसे समाज ‘अनुभव’ या ‘नास्टेल्जिया’ कहता है, वह असल में आपके सिस्टम में फंसी हुई एक पुरानी त्रुटि (Error) है जिसे डीबग नहीं किया गया।

बुद्धिमान वह नहीं है जो बहुत कुछ जानता है, बल्कि वह है जिसके पास ‘डिलीट’ बटन दबाने की क्षमता सबसे अधिक है। यदि आप आज भी उस अपमान को याद रखे हुए हैं जो आपको पांच साल पहले मिला था, तो आप लैंडुअर की उस अवशिष्ट ऊष्मा को अपने भीतर दबाए हुए हैं जो आपके प्रोसेसर को जलाकर राख कर देगी। यह सब लिखना भी ऊर्जा की बर्बादी है। अंततः, आप भी एक ऐसी लिथियम-आयन बैटरी हैं जो फूल चुकी है और जिसका विस्फोट आसन्न है। घर जाओ। बत्ती बुझाओ।

बेकार है। सब कुछ राख है。

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