नरक-गणित

पिछली बार जब हम उस सस्ती व्हिस्की को गटक रहे थे और ‘कॉर्पोरेट संस्कृति’ के धीमे ज़हर पर चर्चा कर रहे थे, तो हम एक बुनियादी और घिनौनी सच्चाई को नज़रअंदाज़ कर गए। हम जिसे ‘करियर’ कहते हैं, वह वास्तव में ब्रह्मांडीय अराजकता (Entropy) के खिलाफ एक हताश और महंगी लड़ाई है। लोग सोचते हैं कि वे ‘सफलता’ या ‘मोक्ष’ के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन भौतिकी की क्रूर दृष्टि से, वे केवल अपने स्थानीय वातावरण में भुखमरी की संभावना को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे आप एक जलते हुए घर में बैठकर फर्नीचर को व्यवस्थित कर रहे हों और उसे ‘प्रगति’ कह रहे हों।

अराजकता

श्रम क्या है? एक अर्थशास्त्री कहेगा कि यह ‘मूल्य सृजन’ है। बकवास। यह केवल ‘फ्री एनर्जी’ का कुप्रबंधन है। आपका मस्तिष्क कोई सुपरकंप्यूटर नहीं है; यह एक डरा हुआ चूहा है जो केवल यह अनुमान लगाने की कोशिश कर रहा है कि अगला झटका कहाँ से लगेगा। जब आप सुबह उस 8:47 की विरार फास्ट लोकल ट्रेन में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की करते हैं, तो क्या आपको लगता है कि आप ‘राष्ट्र निर्माण’ कर रहे हैं? नहीं। आप केवल उस पल उस अजनबी की बगल की पसीने से तर कांख से अपनी नाक को दूर रखने की ज्यामिति (Geometry) हल कर रहे होते हैं।

वह धक्का, वह उमस, वह दूसरे इंसान की सांसों की दुर्गंध जो आपके चेहरे पर पड़ती है—यही असली काम है। ऑफिस की कुर्सी पर बैठकर आप जो एक्सेल शीट भरते हैं, वह तो बस उस मानसिक आघात के बाद का ‘कूल-डाउन’ पीरियड है। हम व्यवस्था बनाने के नाम पर केवल अव्यवस्था को अपने शरीर के भीतर धकेल रहे होते हैं। आप अपनी मानसिक शांति को जलाकर कंपनी की बैलेंस शीट को गर्म रखते हैं। यह ऊष्मप्रवैगिकी (Thermodynamics) का सबसे भद्दा मजाक है: सिस्टम की एन्ट्रापी को स्थिर रखने के लिए आपको खुद को राख में बदलना पड़ता है।

गणना

जब हम ‘टास्क मैनेजमेंट’ की बात करते हैं, तो हम वास्तव में एक दिवालिया हो चुके बैंक के खजाने को संभालने की कोशिश कर रहे होते हैं। आपका प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स उस पुराने स्मार्टफोन की तरह है जिसकी स्क्रीन टूटी हुई है और बैटरी फूल चुकी है। आप उस पर ‘मल्टीटास्किंग’ का भारी ऐप चलाते हैं, और फिर आश्चर्य करते हैं कि दोपहर 3 बजे तक आपको वड़ा-पाव की चटनी से होने वाली एसिडिटी के अलावा कुछ महसूस क्यों नहीं होता। यह थकान मनोवैज्ञानिक नहीं है; यह शुद्ध गणित है। आपके न्यूरॉन्स को फायर करने के लिए जो एटीपी (ATP) खर्च हो रहा है, वह उस बासी समोसे से आ रहा है जिसे आपने लंच में खाया था।

लोग ‘फ्लो स्टेट’ की बात ऐसे करते हैं जैसे यह कोई निर्वाण हो। सच तो यह है कि यह केवल एक सुन्न पड़ चुकी अवस्था है। और इस सुन्नता को बनाए रखने के लिए, हम कैसी-कैसी मूर्खतापूर्ण चीज़ें खरीदते हैं। अपनी खोखली उत्पादकता को ढंकने के लिए, कुछ लोग महंगे मैकेनिकल कीबोर्ड खरीदते हैं। उन प्लास्टिक के बटनों से निकलने वाली ‘खट-खट’ की आवाज़ उन्हें यह भ्रम देती है कि वे कुछ महत्वपूर्ण कर रहे हैं। हज़ारों रुपये एक इनपुट डिवाइस पर खर्च करना, ताकि आप अपनी गुलामी को ‘प्रीमियम’ महसूस करा सकें? यह डूबते हुए टाइटैनिक पर बैठकर चम्मच से पानी बाहर फेंकने जैसा है, बस फर्क यह है कि आप उस चम्मच के लिए भी ईएमआई (EMI) भर रहे हैं।

भ्रम

संगठन (Organizations) क्या हैं? वे सामूहिक डर को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए कृत्रिम पिंजरे हैं। एक ‘मीटिंग’ क्या है? यह उस सन्नाटे को भरने की कोशिश है जो यह स्वीकार करने से पैदा होता है कि हममें से किसी को नहीं पता कि हम क्या कर रहे हैं। हम खुद को धोखा देते हैं कि हम ‘रणनीति’ बना रहे हैं, जबकि हम केवल अपने अस्तित्व के डर को पावरपॉइंट स्लाइड्स के पीछे छिपा रहे होते हैं। आपकी ‘डेडलाइन’ ब्रह्मांड के लिए उतनी ही महत्वहीन है जितनी कि नाली में बहता हुआ प्लास्टिक का कप।

आपकी भावनाएं—गर्व, हताशा, या वह झूठी ‘संतुष्टि’ जो आपको महीने के अंत में मिलती है—केवल सॉफ्टवेयर ग्लिच हैं। वे बायोकेमिकल रिश्वत हैं जो आपके दिमाग को विद्रोह करने से रोकती हैं। प्रकृति को आपके प्रमोशन से कोई लेना-देना नहीं है। कल सुबह जब अलार्म बजेगा, तो आप फिर से उठेंगे, अपनी टाई कसेंगे, और उस मशीन का हिस्सा बनने जाएंगे जो धीरे-धीरे आपको चबा रही है। कोई उम्मीद नहीं है, कोई मोक्ष नहीं है। बस कल फिर वही स्प्रेडशीट और वही एसिडिटी। अब जाओ, अपनी गणना पूरी करो।

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