सड़न का सौंदर्य

“सस्टेनेबिलिटी” (Sustainability) या स्थिरता जैसे शब्दों का उच्चारण बंद करें। यह सुनियोजित पाखंड अब असहनीय हो चुका है। आपका यह व्यापारिक साम्राज्य, जिसे आप गर्व से “कॉर्पोरेट डोमेन” कहते हैं, भौतिकी की नजर में एक सड़ते हुए मांस के टुकड़े से अधिक कुछ नहीं है, जिससे टपकती हुई वसा को आप लाभ (Profit) समझकर चाट रहे हैं।

इल्या प्रिगोजिन ने इसे “विसरण संरचना” (Dissipative Structure) का नाम दिया था, लेकिन यह बहुत ही सौम्य शब्द है। वास्तविकता में, एक जीवित संगठन केवल एक खुली हुई नाली है जो उच्च गुणवत्ता वाली ऊर्जा को निगलता है और उसे कम गुणवत्ता वाले कचरे में बदलकर बाहर फेंकता है। आप व्यवस्था नहीं बना रहे हैं; आप केवल ब्रह्मांड की मृत्यु (Heat Death) की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं।

व्यवस्था का महंगा भ्रम

अपने वातानुकूलित केबिन में बैठकर, आप जिन स्प्रेडशीट्स और डैशबोर्ड्स को किसी पवित्र ग्रंथ की तरह निहारते हैं, वे सार्वजनिक शौचालय की दीवार पर लिखे गए अश्लील नंबरों से अधिक अर्थपूर्ण नहीं हैं। यह सब एक छलावा है।

जरा अपनी कलाई पर बंधी उस टाइटेनियम स्मार्ट वॉच को देखिए। आपने एक ऐसी मशीन के लिए लाखों रुपये खर्च किए हैं जो आपको यह बताती है कि आपका तनाव स्तर बढ़ गया है? क्या विडंबना है। यह उपकरण आपकी “दक्षता” का प्रतीक नहीं है, बल्कि आपकी असुरक्षा का स्मारक है। यह ठीक वैसा ही है जैसे कोई जुआरी, जिसका घर नीलाम हो रहा हो, वह सट्टा बाजार में सौ रुपये जीतने पर जश्न मनाए। वह घड़ी केवल उस गति को माप रही है जिससे आप अपनी जैविक और मानसिक ऊर्जा को धुएं में उड़ा रहे हैं। आप खुद को ‘लीडर’ समझते हैं, लेकिन ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के लिए आप केवल एक माध्यम हैं जिसके जरिए ऊर्जा का अपव्यय होता है।

(महंगे खिलौने, सस्ती सोच।)

नालियों का आत्म-संगठन

इन्नोवेशन (Innovation) शब्द का प्रयोग मेरे सामने मत कीजिए। इससे बदबू आती है। जिसे आप रचनात्मकता कहते हैं, वह वास्तव में संकट में पड़े हुए जीव की छटपटाहट है।

सच्ची “आत्म-संगठन” (Self-organization) प्रक्रिया देखनी है? तो किसी कूड़ा-घर में जाइए और वहां कचरे के ढेर पर बिलबिलाते हुए कीड़ों को देखिए। वे एक अद्भुत पैटर्न में व्यवस्थित होते हैं—न किसी महान दृष्टि के कारण, बल्कि इसलिए कि सड़ी हुई गंदगी को खाने की भूख उन्हें उस ढांचे में ढकेल देती है। आपका स्टार्टअप इकोसिस्टम बिल्कुल यही है।

पुरानी दिल्ली की किसी संकरी गली में जब सीवर लाइन जाम हो जाती है, और गंदा पानी दबाव के कारण किसी दरार से फव्वारे की तरह फूट पड़ता है—उसे आप कॉर्पोरेट भाषा में “पिवट” (Pivot) या “डिसरप्शन” कहते हैं। यह कोई जीनियस रणनीति नहीं है; यह केवल जमा हुई गंदगी का विस्फोट है। सड़क किनारे बैठा मैकेनिक जब थूक और तार से इंजन को जोड़ता है, तो वह किसी वैज्ञानिक सिद्धांत का पालन नहीं कर रहा होता; वह केवल अस्तित्व बचाने की नग्न लड़ाई लड़ रहा होता है। जिसे आप “स्वचालित दक्षता” कहते हैं, वह वास्तव में अक्षमता की एक मशीनीकृत श्रृंखला है, जिसे आपने अपनी कमियों को छिपाने के लिए खड़ा किया है।

(कितनी घिनौनी है यह “प्रगति”।)

अंतिम सत्य: विसरण की अनिवार्यता

ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम क्रूर है। उसे आपके ब्रांड वैल्यू, मिशन स्टेटमेंट या शेयरहोल्डर्स की भावनाओं से कोई लेना-देना नहीं है। आप एक खुली प्रणाली (Open System) हैं। जिस क्षण आप बाहर से “नेगेटिव एंट्रॉपी” (संसाधन, धन, श्रम) चूसना बंद कर देंगे, आप संतुलन (Equilibrium) की स्थिति में आ जाएंगे।

और याद रखें, भौतिकी में संतुलन का अर्थ है—मृत्यु।

आपकी सारी रणनीतियां केवल उस ढलान (Gradient) को खोजने का प्रयास हैं जहां से ऊर्जा सबसे तेजी से बह सके। आप कुछ भी नियंत्रित नहीं कर रहे हैं। आप बस एक फिसलन भरी ढलान पर हैं, और गुरुत्वाकर्षण अपना काम कर रहा है। कल, आपकी कंपनी और उसका सारा घमंड जमी हुई वसा के एक ठंडे, कठोर टुकड़े में बदल जाएगा, जिसे समय की नाली में बहा दिया जाएगा।

अब जाकर अपनी ठंडी चाय पीजिए। यहां देखने के लिए और कुछ नहीं बचा है।

コメント

タイトルとURLをコピーしました