एन्ट्रॉपी की भट्ठी

दुनिया जिसे ‘सार्वजनिक हित’ और ‘कॉर्पोरेट जिम्मेदारी’ के चमकदार रैपर में लपेटकर बेचती है, वह असल में ब्रह्मांड के सबसे क्रूर नियम—उष्मप्रवैगिकी (Thermodynamics)—के खिलाफ एक हारी हुई लड़ाई है। आप जिसे ‘ऑफिस’ कहते हैं, वह ईंट और कांच की इमारत नहीं, बल्कि एक विशालकाय ‘डिसिपेटिव स्ट्रक्चर’ (Dissipative Structure) है। इसका एकमात्र काम है: बाहर से ऊर्जा चूसना और अंदर की सड़न को ‘ऑर्डर’ का नाम देकर बाहर फेंकना।

सच्चाई यह है कि हम किसी महान उद्देश्य के लिए काम नहीं कर रहे। हम बस एक वातानुकूलित कमरे में बैठकर ब्रह्मांड की अराजकता को अपनी मेज के नीचे झाड़ू से सरका रहे हैं।

सभ्यता का अपच

कभी सोचा है कि दफ्तर की कैंटीन में मिलने वाले समोसे और आपके प्रोजेक्ट की डेडलाइन में क्या समानता है? दोनों ही पेट में एक ऐसी जलन पैदा करते हैं जिसे न तो इनो बुझा सकता है और न ही मंथली बोनस। एक संगठन वास्तव में एक जैविक अमाशय की तरह व्यवहार करता है। यह आपके समय, जवानी और मानसिक शांति को निगलता है, उसे संसाधित करता है, और अंत में जिसे ‘डिलीवरी’ कहकर समाज को परोसता है, वह और कुछ नहीं बल्कि शुद्ध, परिष्कृत एन्ट्रॉपी है।

कैसा तमाशा है ये।

जब आपका मैनेजर आप पर चिल्लाता है, तो वह आपको सुधार नहीं रहा होता। वह केवल अपने तंत्रिका तंत्र में जमा हुए उच्च दाब (High Pressure) को कम करने के लिए एक वाल्व खोल रहा होता है। वह दबाव अब आपके सिर में है। यह ‘कार्य’ नहीं है, यह ‘असुविधा की लॉन्ड्रिंग’ (Laundering of Discomfort) है। आप उस गालियों और तनाव के कचरे को घर ले जाते हैं, अपनी पत्नी या बच्चों पर उतारते हैं, और इस तरह समाज का कुल तापमान बढ़ता रहता है। हम सब बस गर्मी पैदा करने वाली भट्ठियां हैं, जो एसी के 24 डिग्री तापमान में भी जल रही हैं।

शून्य का भ्रम और चमड़े की जिल्द

इस अराजकता के बीच, इंसान खुद को यह समझाने के लिए बेताब रहता है कि उसका जीवन नियंत्रण में है। यह हताशा उन बेतुकी वस्तुओं में सबसे ज्यादा झलकती है जिन्हें हम अपनी उत्पादकता बढ़ाने के लिए खरीदते हैं। आप एक असली चमड़े की डायरी (Leather Journal) खरीदते हैं, जिसकी महक मरे हुए जानवर और मरे हुए सपनों का मिश्रण होती है। आप उसमें सुनहरे अक्षरों में ‘To-Do List’ बनाते हैं। यह जानते हुए भी कि उन पन्नों पर लिखी स्याही सूखने से पहले ही आपकी योजनाएँ ध्वस्त हो जाएंगी, आप उसे भरते रहते हैं। यह डायरी व्यवस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आपके अस्तित्व के खोखलेपन को दर्ज करने का एक महंगा कब्रिस्तान है।

यह सब सूचना ज्यामिति (Information Geometry) का एक भद्दा मजाक है। हम फाइलों को एक फोल्डर से दूसरे फोल्डर में खिसकाकर यह भ्रम पालते हैं कि हम ‘डेटा’ को व्यवस्थित कर रहे हैं। असल में, हम बस मैक्सवेल के दानव (Maxwell’s Demon) को रिश्वत देने की कोशिश कर रहे हैं।

पसीने की गंध और सांख्यिकी

शाम की लोकल ट्रेन या मेट्रो में सफर करते समय उस भीड़ को देखिए। पसीने की गंध, थके हुए चेहरे, और एक-दूसरे से न टकराने की जद्दोजहद। यह भौतिकी के ‘ब्राउनियन मोशन’ (Brownian Motion) का जीवंत प्रदर्शन है। हम सब बस एक बंद डिब्बे में कंपन करते हुए कण हैं, जो बेवजह इधर-उधर टकराकर सिस्टम की गर्मी बढ़ा रहे हैं।

आप अपनी जेब से एक महँगी लक्ज़री कलम निकालते हैं, जिसकी कीमत आपके पिता की पहली तनख्वाह से भी ज्यादा है, केवल एक ऐसे दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए जिसे पांच साल बाद रद्दी के भाव बेचा जाएगा। वह कलम आपके हाथ में भारी महसूस होती है—बुद्धि के भार से नहीं, बल्कि उस कर्ज के भार से जो आपने अपनी पहचान बनाने के लिए उठाया है।

ब्रह्मांड को आपके क्वार्टरली लक्ष्यों या एक्सेल शीट के रंगों से कोई फर्क नहीं पड़ता। वह तो बस अपने थर्मल इक्विलिब्रियम (Thermal Equilibrium) की ओर दौड़ रहा है, जहाँ सब कुछ ठंडा और शांत हो जाएगा। आपकी सारी भागदौड़, वह एसिडिटी, वह ईएमआई की चिंता—सब कुछ बस एक सांख्यिकीय त्रुटि है जिसे समय का एक झाोंका मिटा देगा। चाय ठंडी हो चुकी है और उसके ऊपर मलाई की एक गंदी परत जम गई है। बिल्कुल हमारे करियर की तरह।

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