ऊष्मीय सड़ांध

व्यवस्था का भ्रम और ढाबे की भौतिकी

हम जिसे आधुनिक ‘संगठनात्मक संस्कृति’ कहते हैं, वह वास्तव में थर्मोडायनामिक्स का एक बहुत ही महंगा और क्रूर मजाक है। इल्या प्रिगोगिन (Ilya Prigogine) ने जिसे ‘विघटनकारी संरचना’ (Dissipative Structure) कहा था, उसे समझने के लिए आपको किसी प्रयोगशाला में जाने की जरूरत नहीं है। बस अपने ऑफिस की कैंटीन या सड़क किनारे के उस पुराने ढाबे को देखें जहाँ कड़ाही का तेल पिछले छह महीनों से बदला नहीं गया है। एक संगठन ठीक उसी कड़ाही की तरह है—यह सुव्यवस्था (Order) के भ्रम को बनाए रखने के लिए बाहर से ताज़ा ऊर्जा (मानव संसाधन) खींचता है और बदले में वातावरण में केवल एन्ट्रापी (विषाक्तता और तनाव) उगलता है। आप उस काले, गाढ़े तेल में चाहे जितना नया पनीर डाल लें, बाहर जो निकलेगा वह केवल कोलेस्ट्रॉल और जले हुए सपनों का कचरा ही होगा।

एन्ट्रापी का कसाईखाना

सीईओ जब ‘सिनर्जी’, ‘ऑप्टिमाइजेशन’ या ‘ग्रोथ’ की बात करता है, तो वह वास्तव में ऊष्मीय मृत्यु (Heat Death) के खिलाफ एक हारी हुई लड़ाई लड़ रहा होता है। ब्रह्मांड का दूसरा नियम (Second Law of Thermodynamics) अटल है: एक बंद प्रणाली में एन्ट्रापी हमेशा बढ़ती है। कॉर्पोरेट जगत इस नियम को धता बताने की कोशिश करता है, लेकिन इसकी कीमत आपके तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को चुकानी पड़ती है। सिस्टम को ठंडा रखने के लिए, गर्मी को कहीं न कहीं तो निकास चाहिए। और यह ‘गर्मी’ कर्मचारियों के अल्सर, अनिद्रा और दबे हुए क्रोध के रूप में बाहर निकलती है। जिसे आप ‘कार्यक्षमता’ कहते हैं, वह वास्तव में मानव आत्मा को घिसकर पैदा किया गया घर्षण है।

हम इस घर्षण को कम करने के लिए क्या करते हैं? हम एर्गोनॉमिक्स के पीछे छिपते हैं। हमें लगता है कि अगर हमारी रीढ़ की हड्डी सीधी रहेगी, तो हमारी नैतिकता नहीं झुकेगी। आप एक Herman Miller Aeron Chair खरीदते हैं, जिसकी कीमत एक औसत परिवार की साल भर की राशन के बराबर है। यह जालीदार नायलॉन का ढांचा आपके पसीने को तो सोख सकता है, लेकिन यह उस अस्तित्वगत थकान (Existential Fatigue) को नहीं सोख सकता जो आपकी हड्डियों के मज्जा में बस चुकी है। यह कुर्सी वास्तव में एक महंगी व्हीलचेयर है, जो आपको उस डेस्क तक घसीट कर ले जाती है जहाँ आप अपनी जवानी को एक्सेल शीट के खानों में दफन कर रहे हैं। लम्बर सपोर्ट (Lumbar Support) का वादा एक धोखा है; जब रीढ़ ही गिरवी रखी हो, तो कुर्सी का क्या काम?

सार्वजनिक मूल्य का पाखंड

फिर आता है ‘सार्वजनिक मूल्य’ (Public Value) का तमाशा। यह अवधारणा उतनी ही हास्यास्पद है जितनी कि एक कसाई का खुद को ‘पशु कल्याण कार्यकर्ता’ घोषित करना। एक गैर-संतुलन प्रणाली (Non-equilibrium system) के रूप में, व्यवसाय समाज में मूल्य नहीं जोड़ते; वे केवल एन्ट्रापी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करते हैं। वे नदियों को रसायनों से भर देते हैं और फिर अपने मुख्यालय की लॉबी में एक ‘इको-फ्रेंडली’ कृत्रिम झरना लगाते हैं। यह पाप धोने का कॉर्पोरेट तरीका है—एक हाथ से जंगल काटना और दूसरे हाथ से अपनी बालकनी में बोन्साई सजाना।

सूचना ज्यामिति (Information Geometry) के नजरिए से देखें तो, कॉर्पोरेट डेटा का ‘मैनिफोल्ड’ झूठ और लीपापोती से भरा होता है। जब आंतरिक मूल्य शून्य हो जाता है, तो बाहरी आवरण ही एकमात्र वास्तविकता बन जाता है। मिडिल मैनेजमेंट के लोग इस शून्यता को भरने के लिए विलासिता का सहारा लेते हैं। वे उस Louis Vuitton Business Bag को ऐसे जकड़ कर चलते हैं जैसे कि वह कोई जीवन रक्षक प्रणाली हो। उस महंगे, मोनोग्राम वाले चमड़े के अंदर क्या है? वही पुरानी, सड़ी हुई फाइलों का ढेर, बासी सैंडविच की गंध और एक अस्वीकृत छुट्टी की अर्जी। यह विलासिता नहीं है; यह एक हताश संकेत है कि “मैं अभी भी सिस्टम के नियंत्रण में हूँ,” जबकि वास्तव में सिस्टम उन्हें चबाकर थूकने ही वाला है।

शून्य की ओर

अंततः, हर संगठन उस बिंदु की ओर बढ़ रहा है जहाँ ऊर्जा का कोई सार्थक आदान-प्रदान संभव नहीं होगा। हम ‘एन्ट्रापी मिनिमाइजेशन’ के नाम पर जीवन के उस ‘शोर’ (Noise) को खत्म कर रहे हैं जो हमें इंसान बनाता है। एक पूर्णतः कुशल ऑफिस एक मुर्दाघर के समान है—शांत, ठंडा और पूरी तरह से व्यवस्थित। हम केवल इस बात पर बहस कर रहे हैं कि इस ढहती हुई इमारत की खिड़कियों पर कौन सा पर्दा सबसे अच्छा लगेगा, जबकि नींव पहले ही गल चुकी है।

घर जाओ। यहाँ देखने के लिए अब कुछ नहीं बचा। बस एसी की वो धीमी, नीरस गुंजन है जो धीरे-धीरे आपके दिमाग को सुन्न कर रही है।

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