ऊष्मीय अपक्षय

संगठनात्मक श्मशान और एन्ट्रॉपी का नृत्य

किसी भी आधुनिक कॉरपोरेट बोर्डरूम की वातानुकूलित हवा में सांस लेते ही मुझे सड़े हुए फूलों और पुराने चमड़े की गंध नहीं, बल्कि ‘सिनर्जी’, ‘पैराडाइम शिफ्ट’ और ‘सस्टेनेबिलिटी’ जैसे शब्दों की सड़न महसूस होती है। यह वह जगह है जहाँ विचार मरने के लिए आते हैं, और जहाँ मानव आत्मा का अंतिम संस्कार पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से किया जाता है। भौतिकी में ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) का दूसरा नियम एक क्रूर तानाशाह की तरह है—ब्रह्मांड की कुल ‘एन्ट्रॉपी’ या अव्यवस्था हमेशा बढ़ती है। लेकिन इन सूट-बूट वाले प्रबंधकों को देखिए, ये समझते हैं कि एक ‘एजाइल वर्कफ़्लो’ बनाकर ये ब्रह्मांड के मौलिक नियमों को चकमा दे देंगे। क्या बकवास है।

इल्या प्रिगोगिन ने जिन ‘डिसिपेटिव स्ट्रक्चर्स’ (Dissipative Structures) की बात की थी, वह कोई सुंदर कविता नहीं थी। वह एक चेतावनी थी। जीवित तंत्र—और दुर्भाग्य से ये संगठन भी—केवल इसलिए अपना अस्तित्व बनाए रखते हैं क्योंकि वे वातावरण से उच्च गुणवत्ता वाली ऊर्जा चूसते हैं और बदले में कम गुणवत्ता वाला कचरा बाहर फेंकते हैं। आपका ऑफिस, मूल रूप से, एक ऊष्मीय इंजन है जो युवाओं के उत्साह को ईंधन के रूप में जलाता है और धुएं के रूप में मानसिक अवसाद और एक्सेल शीट पैदा करता है। जिसे आप ‘जीडीपी ग्रोथ’ कहते हैं, वह ब्रह्मांडीय पैमाने पर केवल गर्मी का एक और विस्फोट है जो हमें ऊष्मीय मृत्यु (Heat Death) के करीब ले जा रहा है।

सिलिकॉन के तर्कों का खोखलापन

और अब, हमारे पास यह नया खिलौना है—’स्वचालित गणना परिपथ’ (जिसे आम भाषा में लोग एआई कह कर पूज रहे हैं)। हेगेल ने ‘औफहेबेन’ (Aufheben) या द्वंदात्मक उदात्तीकरण की बात की थी, जहाँ पुराना नष्ट होकर एक उच्च स्तर पर संरक्षित होता है। लेकिन यहाँ क्या हो रहा है? यह श्रम का उदात्तीकरण नहीं, बल्कि उसका ‘कचराकरण’ है। ये एल्गोरिदम मैक्सवेल के दानव (Maxwell’s Demon) की तरह व्यवहार करने का नाटक करते हैं, यह दावा करते हुए कि वे सूचनाओं के अराजक समुद्र से अर्थ के अणु छांट लेंगे। लेकिन वे भूल जाते हैं कि दानव को भी काम करने के लिए ऊर्जा चाहिए, और वह ऊर्जा अंततः सिस्टम को और अधिक गर्म कर देती है।

हम रचनात्मकता को स्वचालित नहीं कर रहे; हम केवल अपनी बोरियत को सिलिकॉन चिप्स को आउटसोर्स कर रहे हैं। नतीजा? एक ऐसा समाज जहाँ हर कोई व्यस्त है, लेकिन कोई भी कुछ बना नहीं रहा। यह ठीक वैसा ही है जैसे आप अपनी रीढ़ की हड्डी को सहारा देने के लिए एक डेढ़ लाख रुपये की एर्गोनोमिक कुर्सी खरीद लें। यह कुर्सी आपकी पीठ को तो सीधा रख सकती है, लेकिन उस रीढ़हीनता का क्या जो आपको बॉस के हर बेतुके आदेश पर ‘यस सर’ कहने पर मजबूर करती है? हास्यास्पद है। आप एक ऐसे सिंहासन पर बैठे हैं जो आपकी गुलामी को आरामदायक बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और आप इसे ‘सफलता’ कहते हैं।

सार्वजनिकता का ऊष्मीय अंत

गैर-संतुलन ऊष्मागतिकी (Non-equilibrium Thermodynamics) के नजरिए से देखें, तो ‘सार्वजनिकता’ या पब्लिकनेस का अर्थ था—घर्षण। अलग-अलग विचारों का टकराव, जो गर्मी पैदा करता था लेकिन जीवन भी देता था। आज के डेटा-संचालित व्यवसाय इस घर्षण को ‘अकुशलता’ मानकर खत्म कर रहे हैं। वे समाज को एक समतल, ठंडे और मृत संतुलन की ओर धकेल रहे हैं जहाँ हर कोई एक ही तरह के ‘कस्टमाइज्ड’ फीड देख रहा है। विविधता का ढोंग केवल एक सांख्यिकीय त्रुटि है जिसे ठीक किया जा रहा है।

हम एक ऐसे बिंदु पर पहुँच रहे हैं जहाँ मानव होना ही एक ‘बग’ माना जाएगा। हमारी भावनाएँ, हमारा गुस्सा, हमारी अनिश्चितता—यह सब उस महान मशीन के लिए केवल शोर है जिसे हम ‘प्रगति’ कहते हैं। और इस शोर से बचने के लिए, आप क्या करते हैं? आप बाजार जाते हैं और अस्सी हजार के शोर रद्द करने वाले हेडफोन खरीद लाते हैं। वाह! बाहरी दुनिया के शोर को तो आपने म्यूट कर दिया, लेकिन आपके भीतर जो खालीपन चिल्ला रहा है, उसे किस बटन से बंद करेंगे? उफ, क्या तमाशा है।

संगठन अब मूल्य सृजन के केंद्र नहीं रहे; वे केवल एन्ट्रॉपी के डंपिंग ग्राउंड हैं। हम यहाँ काम करने नहीं, बल्कि धीरे-धीरे जलकर राख होने आए हैं। और यह जो आपके हाथ में महंगा मैकेनिकल कीबोर्ड है, जिसकी हर ‘क्लिक’ आपको लगता है कि दुनिया बदल रही है—वह असल में आपके जीवन के बचे हुए सेकंड्स की उल्टी गिनती है। टाइप करते रहिए। अंत तो वैसे भी लिखा जा चुका है।

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